वृंदावन इक सुन्दर जोरी भजन

वृंदावन इक सुन्दर जोरी भजन

भुवन चतुर्दस की सबै, सुंदरता सिरमौर।
सुंदर वर जोरी बनी, वृन्दावन निज ठौर॥

दोहा अर्थ ~
​श्री वृंदावन निज़ धाम में नित्य विहार पारायण इस सुंदर जोड़ी के समक्ष चौदह भुवन का सौंदर्य भी गौण कोटि का लगता है।

​पद ~
​वृन्दावन इक सुन्दर जोरी।
खेलत जहाँ तहाँ बंशीवट, नंदनँदन वृषभानु किसोरी॥
भुवन चतुर्दस की सुन्दरता, सुन्दर स्याम राधिका गोरी।
जै श्रीभट कहाँ लौ बरनौं, रसना एक नाहिं लख कोरी॥
​~ श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक

​पद - अर्थ ~
​श्री वृंदावन धाम में एक अति ही सुंदर जोड़ी विराजमान है जो बंशीवट के निकट रमणीय स्थान पर केलि पारायण विहरण करते हैं। उनमें से एक तो नंदनन्दन श्री श्यामसुंदर हैं और दूसरी वृषभानु दुलारी श्री किशोरी जु हैं। चौदह लोकों की संपूर्ण सुंदरता भी गौर वर्णा श्री राधा और सांवले सरकार श्री कृष्ण पर न्योछावर है। श्री भट्ट देवाचार्य कहते हैं "आखिरकार, किस सीमा तक मैं इसका वर्णन कर सकता हूँ, क्योंकि वृंदावन और दिव्य दंपति की महिमा का वर्णन करना असंभव है, भले ही मुझे अनन्त कोटि रसना क्यों ना प्राप्त हो जाए।"



वृंदावन इक सुन्दर जोरी | Vrindavan Ik Sundar Jori | श्रीभट्ट देवाचार्य जी युगल शतक | Shri Indresh Ji

ऐसे ही मधुर भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार सोंग्स को ढूंढें.
 

पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।

 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर,हरियाणवी सोंग्स गढ़वाली सोंग्स लिरिक्स आध्यात्मिक भजन गुरु भजन, सतगुरु भजन का संग्रह। इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें

Next Post Previous Post