श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट बिराज भजन

श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ भजन

 
श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ लिरिक्स Shri Govardhan Maharaj Tere Mathe Mukut Lyrics

श्री गोवर्धन महाराज....महाराज
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ
श्री गोवर्धन महाराज....महाराज
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ
श्री गोवर्धन महाराज....महाराज
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ
श्री गोवर्धन महाराज....महाराज
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ

तौपे पान चढ़े तौपे फूल चढे़
तौपे पान चढ़े तौपे फूल चढे़
और चढ़े दूध की धार
 हाँ धार
 तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ
श्री गोवर्धन महाराज....महाराज
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ

तेरे गले में कण्ठा सोह रह्यौ
तेरे गले में कण्ठा सोह रह्यौ
तेरी झाँकी बनी विशाल
विशाल
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यौ
श्री गोवर्धन महाराज....महाराज
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ

तेरी झाँकी बनी विशाल, विशाल,
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ।
श्री गोवर्धन महाराज....महाराज
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ

तेरी सात कोस की परिक्रमा
तेरी सात कोस की परिक्रमा
चकलेश्वर है विश्राम
 विश्राम

तेरे माथे मुतेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ
मुकुट बिराज रह्यौ॥
श्री गोवर्धन महाराज....महाराज
तेरे माथे मुकुट बिराज रह्यौ


Shri Govardhan Maharaj तेरे माथे मुकुट बिराज रहयो !! Popular Krishna Bhajan !! Devkinandan JiMaharaj
 
Shree Govardhan Mahaaraaj....mahaaraaj
Tere Maathe Mukut Biraaj Rahyau
Shree Govardhan Mahaaraaj....mahaaraaj
Tere Maathe Mukut Biraaj Rahyau
Shree Govardhan Mahaaraaj....mahaaraaj
Tere Maathe Mukut Biraaj Rahyau
Shree Govardhan Mahaaraaj....mahaaraaj
Tere Maathe Mukut Biraaj Rahyau

गोवर्धन महाराज तो कान्हा के सबसे प्यारे पर्वत हैं ना, जिन्होंने इंद्रदेव के कहर से ब्रजवासियों को बचाया जब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। उनकी महत्ता इतनी बड़ी है कि वे पृथ्वी के अन्नदाता हैं, हरियाली और गायों के रक्षक, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से भरे हुए जो हमारी सेहत को ठीक रखते हैं। गोवर्धन परिक्रमा तो बस 21 किलोमीटर का चक्कर लगाना है, लेकिन हर कदम पर कृष्ण कथा याद आती है, राधा-कृष्ण के चरण पड़ते हैं, और मन शुद्ध हो जाता है – सुबह जल्दी उठो, व्रत रखो, चले जाओ और पूजा करो, 36 घाटों पर दंडवत प्रणाम दो, फिर प्रसाद खाओ। ये परिक्रमा करने से पाप मिटते हैं, भक्ति बढ़ती है, और जीवन में सुख-शांति आ जाती है, बस एक बार कर लो तो हमेशा मन में बस जाएंगे महाराज!


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