मैं हूँ केवल आपका आप हो मेरे भजन
मैं हूँ केवल आपका आप हो मेरे नाथ भजन
एक बार सरल हृदय से, एक बार सरल हृदय से,
स्वीकार करो सब आज,
मैं हूँ केवल आपका, आप हो मेरे नाथ,
स्वामी जी की वाणी है ये, हे मेरे नाथ, हे मेरे नाथ,
स्वामी जी की वाणी है ये, हे मेरे नाथ, हे मेरे नाथ,
मन्त्रों का ये महामंत्र है, हे मेरे नाथ, हे मेरे नाथ,
ये महामंत्र जीवन में,
ये महामंत्र जीवन में, धारण कर सब आज,
मैं हूँ केवल आपका, आप हो मेरे नाथ,
मैं हूँ केवल आपका, आप हो मेरे नाथ,
परम प्रेम की प्राप्ति का भैया, मिल गया राम बारम्बार,
परम प्रेम की प्राप्ति का भैया, मिल गया राम बारम्बार,
हे मेरे नाथ, हे मेरे नाथ,
हे मेरे नाथ, हे मेरे नाथ,
मैं आप को भुलू नहीं, मैं आप को भुलू नहीं,
रखूँगा हरदम याद,
मैं हूँ केवल आपका, आप हो मेरे नाथ,
मैं हूँ केवल आपका, आप हो मेरे नाथ,
बार बार कहते रहो, हे मेरे नाथ, हे मेरे नाथ,
स्वाँस स्वांस कहते रहो, हे मेरे नाथ, हे मेरे नाथ,
आप हो हरदम मेरे साथ, हे मेरे नाथ, हे मेरे नाथ,
करुण हृदय से करो पुकार, हे मेरे नाथ, हे मेरे नाथ,
कृपा आपकी बरस रही है,
कृपा आपकी बरस रही है,भूलूँ नहीं मैं नाथ,
मैं हूँ केवल आपका, आप हो मेरे नाथ,
मैं हूँ केवल आपका, आप हो मेरे नाथ,
मैं हूँ केवल आपका, आप हो मेरे नाथ,
एक बार सरल हृदय से, एक बार सरल हृदय से,
स्वीकार करो सब आज,
मैं हूँ केवल आपका, आप हो मेरे नाथ,
मै हूँ केवल आपका आप हो मेरे नाथ (He Mere Naath He Mere Nath
परम श्रधेय स्व. स्वामीजी रामसुख दास जी का प्रिय भजन ! उनके श्री चरणों में सादर समर्पित !
सरल हृदय से एक बार सब कुछ स्वीकार कर लो – सारी दुनिया, सारी चिंताएँ, सारे रिश्ते – बस तुम्हारे चरणों में रख दो। स्वामी जी की ये वाणी जैसे कोई महामंत्र है, जो जीवन में धारण कर लेने से हर पल बदल जाता है। परम प्रेम की प्राप्ति बार-बार राम के रूप में मिलती है, और वो प्रेम इतना गहरा है कि भूलना नामुमकिन हो जाता है। हरदम याद रखना है, हर सांस में उनका नाम घुल जाना है, ताकि कभी अलगाव का एहसास न हो। जैसे कोई प्रेमी बार-बार कहता हो, “हे नाथ, तुम मेरे हो, मैं तुम्हारा,” और आँखें बंद होते ही वही चेहरा सामने आ जाए।
साँस-साँस में पुकारते रहो, हे मेरे नाथ, हे मेरे नाथ। करुणा से भरे हृदय से बुलाओ, क्योंकि उनकी कृपा तो बरस ही रही है, बस हमें भूलना नहीं है। वो हरदम साथ हैं, हर कदम पर थामे हुए हैं, बस हमारा सरल समर्पण चाहिए। एक बार दिल से कह दो, “मैं केवल तुम्हारा हूँ,” तो सारी जिंदगी का बोझ हल्का हो जाता है, हर मुश्किल आसान लगने लगती है। ये महामंत्र जीवन को नया अर्थ देता है – प्रेम में डूब जाना, नाथ के चरणों में बस जाना, और हर पल उनकी कृपा महसूस करना। दिल कहता है कि अब बस यही काफी है, क्योंकि नाथ का साथ मिल गया तो दुनिया की कोई कमी नहीं रहती।
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