पालने में खेले मेरो छोटो सो कन्हैया भजन
पालने में खेले मेरो छोटो सो कन्हैया भजन
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया
एकटक मैया यशोदा निहारती
माथे पर घुँघराले
कारे कारे सोहे लट
यशोमति मैया है संवारती
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया।
देख देख मैया को
कन्हैया मारे किलकारी
सांवरी सुरतिया पे
मन हर्षे है
विहसि विहसि मैया
गोद में खिलावे
लल्ला लल्ला कह के दुलारती
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया।
तन सोहे पीतांबर
भाल सोहे चंदा
मोर मुकुट सिर सोवत है
पाँव पैजनीया
कर की मुरलिया
कान्हा कान्हा है पुकारती
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया।
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया
एकटक मैया यशोदा निहारती
माथे पर घुँघराले
कारे कारे सोहे लट
यशोमति मैया है संवारती
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया।
छोटो सो कन्हैया
एकटक मैया यशोदा निहारती
माथे पर घुँघराले
कारे कारे सोहे लट
यशोमति मैया है संवारती
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया।
देख देख मैया को
कन्हैया मारे किलकारी
सांवरी सुरतिया पे
मन हर्षे है
विहसि विहसि मैया
गोद में खिलावे
लल्ला लल्ला कह के दुलारती
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया।
तन सोहे पीतांबर
भाल सोहे चंदा
मोर मुकुट सिर सोवत है
पाँव पैजनीया
कर की मुरलिया
कान्हा कान्हा है पुकारती
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया।
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया
एकटक मैया यशोदा निहारती
माथे पर घुँघराले
कारे कारे सोहे लट
यशोमति मैया है संवारती
पालने में खेले मेरो
छोटो सो कन्हैया।
पालने में खेले मेरो छोटो सो कन्हैया || कृष्ण भजन || गायक पं सुनील पाठक || तबला बाबा रामध्यान गुप्ता
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पालने में झूलते हुए छोटे से कन्हैया का रूप मन को मोह लेता है। यशोदा मैया की गोद में वह नटखट बालक किलकारियाँ मारता है, और उसकी साँवली सूरत पर माँ का मन बार-बार हरषाता है। घुंघराले काले बालों को मैया प्यार से संवारती है, जैसे हर लट में प्रेम की गंगा बह रही हो। कन्हैया की मुस्कान और उनकी नटखट हरकतें देखकर मैया का मन विह्वल हो उठता है। वह उसे गोद में लेकर लाड लड़ाती है, और हर पल उसे लल्ला कहकर पुकारती है। यह दृश्य इतना मनोरम है कि मन बस उसी में खो जाना चाहता है। कन्हैया का पीतांबर, माथे पर चंदन, मोर मुकुट और पाँवों में पैजनियाँ उनकी शोभा को और बढ़ा देती हैं। मुरली की मधुर धुन और मैया की पुकार में प्रेम का वह रस घुला है, जो आत्मा को तृप्त कर देता है।
कन्हैया, जिन्हें हम अपने नन्हे नंदलाल के रूप में पूजते हैं, हिंदू धर्म में प्रेम और भक्ति का प्रतीक हैं। उनका बाल रूप हर भक्त के मन को लुभाता है, और उनकी लीलाएँ अनंत हैं। यशोदा के लाडले, मुरलीधर, गोविंद, गोपाल—हर नाम में उनकी महिमा बसी है। वे न केवल नटखट बालक हैं, बल्कि जगत के रक्षक, भवसागर से पार लगाने वाले हैं। उनकी मुरली की तान मन को मोह लेती है, और उनकी कृपा से हर भक्त का जीवन प्रेम और आनंद से भर जाता है। यशोदा की गोद में खेलने वाला यह कन्हैया हर भक्त के हृदय में बसता है, और उनकी भक्ति में डूबकर मन को परम सुख की अनुभूति होती है। वे हमारे प्रिय ठाकुर जी हैं, जिनके चरणों में सारा संसार नतमस्तक है।
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कन्हैया, जिन्हें हम अपने नन्हे नंदलाल के रूप में पूजते हैं, हिंदू धर्म में प्रेम और भक्ति का प्रतीक हैं। उनका बाल रूप हर भक्त के मन को लुभाता है, और उनकी लीलाएँ अनंत हैं। यशोदा के लाडले, मुरलीधर, गोविंद, गोपाल—हर नाम में उनकी महिमा बसी है। वे न केवल नटखट बालक हैं, बल्कि जगत के रक्षक, भवसागर से पार लगाने वाले हैं। उनकी मुरली की तान मन को मोह लेती है, और उनकी कृपा से हर भक्त का जीवन प्रेम और आनंद से भर जाता है। यशोदा की गोद में खेलने वाला यह कन्हैया हर भक्त के हृदय में बसता है, और उनकी भक्ति में डूबकर मन को परम सुख की अनुभूति होती है। वे हमारे प्रिय ठाकुर जी हैं, जिनके चरणों में सारा संसार नतमस्तक है।
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Author - Saroj Jangir
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