मनवां तो अधर बस्या बहुतक झीणां होइ मीनिंग
मनवां तो अधर बस्या, बहुतक झीणां होइ।
आलोकत सचु पाइया, कबहूँ न न्यारा सोइ॥
मनवां तो : मन तो, चित्त तो.
अधर : निराधार, आधारहीन, शून्य की स्थिति.
बस्या : आवास करने लगा है.
बहुतक : बहुत से, अधिकतर, बहुत ही.
झीणां होइ : विरल हो गया है (मन)
आलोकत : निरखने से, देखने से, अवलोकन करने से.
सचु पाइया : आनंद की प्राप्ति होती है.
कबहूँ न : कभी नहीं.
न्यारा सोइ : न्यारा होना, प्रथक होना, अलग होना.
भक्ति मार्ग की साधना का उल्लेख करते हुए कबीर साहेब वाणी देते हैं की साधक का मन अब ब्रह्म रंध्र में, संसार से विमुख होकर पूर्ण ब्रह्म में समा गया है. यह अवस्था अत्यंत ही झीणा और विरल है. इस परम स्थिति को प्राप्त करने के उपरान्त, परम आनंद को प्राप्त करने के उपरांत अब वह इनसे विलग नहीं हो सकता है.
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Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं कबीर के दोहों को अर्थ सहित, कबीर भजन, आदि को सांझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें।
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