दीनों का नाथ सांवरा लेगा तेरी खबर भजन
दीनों का नाथ सांवरा लेगा तेरी खबर भजन
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर,
दीनों का नाथ सांवरा,
लेगा तेरी खबर।।
कोई यहां नहीं तेरा,
आंसू जो पोंछ दे,
इस जग की रीत है यही,
इतना तू सोच ले,
दुनिया को भूल श्याम से,
बस तू उम्मीद कर,
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
सेठों का सेठ है यहां,
बैठा जो सामने,
जिनको भी देखो वो यहां,
आता है मांगने,
राजा हो या हो रंक वो,
मांगें हैं बेफिकर,
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
दर दर झुकाना शीश को,
अच्छा नहीं कहीं,
करता जो भक्तों की फिक्र,
दातार है वही,
इनकी कृपा हुई तभी,
आया तू द्वार पर,
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
इस दर की बात क्या कहूं,
आया जो हार कर,
हारे का साथी श्याम है,
लिखा है द्वार पर,
कैलाश पे यकीन कर,
चौखट पे रख दे सर,
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर,
दीनों का नाथ सांवरा,
लेगा तेरी खबर।।
रख तो ज़रा सबर,
दीनों का नाथ सांवरा,
लेगा तेरी खबर।।
कोई यहां नहीं तेरा,
आंसू जो पोंछ दे,
इस जग की रीत है यही,
इतना तू सोच ले,
दुनिया को भूल श्याम से,
बस तू उम्मीद कर,
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
सेठों का सेठ है यहां,
बैठा जो सामने,
जिनको भी देखो वो यहां,
आता है मांगने,
राजा हो या हो रंक वो,
मांगें हैं बेफिकर,
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
दर दर झुकाना शीश को,
अच्छा नहीं कहीं,
करता जो भक्तों की फिक्र,
दातार है वही,
इनकी कृपा हुई तभी,
आया तू द्वार पर,
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
इस दर की बात क्या कहूं,
आया जो हार कर,
हारे का साथी श्याम है,
लिखा है द्वार पर,
कैलाश पे यकीन कर,
चौखट पे रख दे सर,
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर।।
रोता है क्यों तू बावरे,
रख तो ज़रा सबर,
दीनों का नाथ सांवरा,
लेगा तेरी खबर।।
बहादुरपुर श्याम मंदिर एकादशी कीर्तन पटना,,,,,
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दुख की घड़ी में आँसू बहाना छोड़ दें, थोड़ा सब्र रखें तो श्याम बाबा जी खुद खबर लेने आ जाते हैं। दुनिया की रीत ऐसी है, कोई अपना नहीं जो आँसू पोंछे, लेकिन सेठों के सेठ बैठे हैं द्वार पर, राजा-रंक सब मांगते हैं बेफिक्र। दर-दर न झुकें, बस दीनों के नाथ के चरणों में सर रख दें। हारे को साथी बनाने वाले साँवरे जी की कृपा से सब ठीक हो जाता है, जैसे वो विधवा को जो रोटी माँगने आई थी, घर भर दिया। उम्मीद न छोड़ें, ये द्वार पर ही लिखा है कि कैलाश पे यकीन करो। जीवन की मुश्किलें आती हैं, लेकिन प्रभु की याद से मन को सुकून मिलता है।
श्याम जी भक्तों की फिक्र करते हैं, बस द्वार तक पहुँच जाओ हारकर। यहाँ आया हर कोई मुराद लेकर जाता है, बस सब्र और विश्वास चाहिए। दुनिया भूल जाओ, प्रभु पर भरोसा रखो, तो हर दर्द हल्का पड़ जाता है। याद रखो उस किसान को, जो फसल बर्बाद होने पर भी श्याम का नाम जपता रहा, अगले साल बंपर पैदा हुई। इश्वर का आशीर्वाद हर कदम पर साथ देता है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री श्याम बाबा जी की।
श्याम जी भक्तों की फिक्र करते हैं, बस द्वार तक पहुँच जाओ हारकर। यहाँ आया हर कोई मुराद लेकर जाता है, बस सब्र और विश्वास चाहिए। दुनिया भूल जाओ, प्रभु पर भरोसा रखो, तो हर दर्द हल्का पड़ जाता है। याद रखो उस किसान को, जो फसल बर्बाद होने पर भी श्याम का नाम जपता रहा, अगले साल बंपर पैदा हुई। इश्वर का आशीर्वाद हर कदम पर साथ देता है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री श्याम बाबा जी की।
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