हे पांच गज रा कपड़ा मंगाया भजन

हे पांच गज रा कपड़ा मंगाया भजन

हे पांच गज रा कपड़ा मंगाया हा,
हे सुरता ताराग डोरी भरी,
तीन गुण रा हुआ प्रकाशा,
हे झोली मोड़ी है खरा खरी,
मैं अलखिया पीर पिछम रा,
सत री झोली बाबा तीर करी रे हा।।

हा आऊं हसला साउ सिपिया,
हे वसन भभूती में रया खरी,
चार जुगों सूं फिरूं भटकतो,
अबके मिलिया परम हरी,
मैं अलखिया पीर पिछम रा,
सत री झोली बाबा तीर करी रे हा।।

पांच बगला पचीस मेडियो,
नव दरवाजा जोया खरी,
दसवें द्वारे अलख जगायो,
चारों सेहरिया में खबरों पड़ी,
मैं अलखिया पीर पिछम रा,
सत री झोली बाबा तीर करी रे हा।।

एक अलखये शब्द सुनायो,
ओ सुन में शब्द लगन करी,
दयानाथ री विनती,
ने आवूं सोरासी खरी,
मैं अलखिया पीर पिछम रा,
सत री झोली बाबा तीर करी रे हा।।

हे पांच गज रा कपड़ा मंगाया हा,
हे सुरता ताराग डोरी भरी,
तीन गुण रा हुआ प्रकाशा,
हे झोली मोड़ी है खरा खरी,
मैं अलखिया पीर पिछम रा,
सत री झोली बाबा तीर करी रे हा।।



मैं अलखिया पीर पीछम रा || Suresh Lohar || बाबा रामदेव जी की निर्गुण धारा योग परख वाणी || Desi Bhajan

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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