होली खेलन आयो श्याम आज याहि रंग में भजन

होली खेलन आयो श्याम आज याहि रंग में बोरो भजन

होली खेलन आयो श्याम
आज याहि रंग में बोरो री,

कोरे-कोरे कलश मँगाओ,
रंग केसर को घोरो री,
मुख ते केशर मलो,
करो याहि कारे से गोरो री,
रंग-बिरंगो करो आज,
याहि कारे से गोरो री,
होली खेलन आयो श्याम,
आज याहि रंग में बोरो री,

पार पड़ौसिन बोलि,
याहि आँगन में घेरो री,
पीताम्बर लेउ छीन,
याहि पहराय देउ लहँगो री,
होली खेलन आयो श्याम,
आज याहि रंग में बोरो री,

हरे बाँस की बाँसुरिया,
याहि तोड़-मरोड़ी री ,
तारी दे दे याहि नचावो,
अपनी ओरो री,
होली खेलन आयो श्याम,
आज याहि रंग में बोरो री,

चन्द्रसखी की यही विनती,
करे निहोरो री ,
हा हा खाय पड़े जब,
पैया तब याहि छोरो री,
होली खेलन आयो श्याम,
आज याहि रंग में बोरो री

होली खेलन आयो श्याम
होली खेलन आयो श्याम,
आज याहि रंग में बोरो री



होरी खेलन आयो श्याम आज याहे रंग में बोरो री🥀Shri indresh updhyay 🥀Holi rasiya

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होली का मौसम आते ही श्री कृष्ण जी का आगमन घर को रंगीन बना देता है। कोरे कलश में केसर घोलकर, मुख और केशर से रंगकर, सब कुछ गोरा-काला रंग में डुबो देना—ये प्रेम की लीला है। पार-पड़ोस मिलकर घेर लें, पीताम्बर छीनकर लहंगा पहनाएं, तो मस्ती दोगुनी हो जाती है। बांसुरी तोड़कर नचाना, हा-हा खाने का निहोरना, ये सब भक्ति का रंग चढ़ाने का बहाना है। इश्वर का आशीर्वाद ही इस उमंग को अमर बनाता है।

श्याम के संग होली खेलना जीवन को उत्सव बना देता है। वो आते ही आँगन रंग-बिरंगा कर देते हैं, और दिल में नई धुन बजा देते हैं। सखी की विनती पर वो रुकते हैं, ताकि हर पल यादगार बने। ये रंग न उतरे, बस यही चाहत रहती है, ताकि हर दिन होली सरीखा लगे। आप सब पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कृष्ण जी की। 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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