तक़दीर मुझे ले चल श्रीनाथ जी की नगरी भजन

तक़दीर मुझे ले चल श्रीनाथ जी की नगरी भजन

राधे राधे, राधे राधे, राधे राधे,
राधे राधे, राधे राधे, राधे राधे।
मेवाड़ में हर रंग के दीवाने मिलेंगे,
आपस में बड़े प्यार से बेगाने मिलेंगे,
हर देस से पहुंचेंगे दर्शन को सब भगत,
चारों तरफ श्याम के परवाने मिलेंगे,
तकदीर मुझे ले चल श्रीनाथ की नगरी में,
तक़दीर मुझे ले चल श्रीनाथ की नगरी में,
ये उमर गुज़र जाए श्रीनाथ की नगरी में।

क्या जाने कोई क्या है श्रीनाथ का दरबारा,
सबसे बड़ा है जग में श्रीनाथ का दरबारा,
बैठा है मुरलीधर ये श्रीनाथ मेरा बाबा,
मुख पर सबके आए ये राधा का ही नाम,
राधे राधे जप के बनते हैं बिगड़े काम,
ये उमर गुज़र जाए श्रीनाथ की नगरी में।

श्री नाथद्वारा जाऊँ श्री जी के गुणगाऊँ,
सबसे पहले आ के चरणों में शीश जुकाऊँ
एक तेरा नाम लेकर भवसागर तर जाऊँ
मेरी भी काम ना आए श्री नाथद्वारा जाऊँ
ये उमर गुज़र जाए श्रीनाथ की नगरी में।

मीरा ने जब पुकारा तुम दौड़े चले आए,
एक तेरे भरोसे ही दुनिया में दुख उठाए,
मेरी भी सुन लो विनती बस दृश्य से चाहता हूँ,
मुझको बुला लो श्रीजी मैं द्वार तेरे आऊँ,
तकदीर मुझे ले चल श्रीनाथ की नगरी में
ये उमर गुज़र जाए श्रीनाथ की नगरी में।

तकदीर मुझे ले चल श्री नाथ की नगरी में Taqdeer Muje Le Chal shree Nath Ki Nagri Main Mohit Mali

Raadhe Raadhe, Raadhe Raadhe, Raadhe Raadhe,
Raadhe Raadhe, Raadhe Raadhe, Raadhe Raadhe.
Mevaad Mein Har Rang Ke Divaane Milenge,
Aapas Mein Bade Pyaar Se Begaane Milenge,
Har Des Se Pahunchenge Darshan Ko Sab Bhagat,
Chaaron Taraph Shyaam Ke Paravaane Milenge,
Takadir Mujhe Le Chal Shrinaath Ki Nagari Mein,
Taqadir Mujhe Le Chal Shrinaath Ki Nagari Mein,
Ye Umar Guzar Jae Shrinaath Ki Nagari Mein.


SINGER - MOHIT MALI
COPYRIGHT- Sahnaz Akhtar

मेवाड़ की धरती पर राधे-राधे की धुन हर गली में गूंजती है, हर रंग के दीवाने मिलते हैं, बेगाने भी प्यार से गले लगते। चारों ओर श्याम के परवाने डोलते, हर देश से भक्त दर्शन को चले आते, श्रीनाथ की नगरी में मन रम जाता। मुरलीधर बाबा विराजे, राधा का नाम हर जुबान पर, जपते ही बिगड़े काम संवर जाते। मीरा की पुकार सुनकर दौड़े चले आए, भरोसे पर दुख सहा, विनती सुन ले ऐसी दया बरसे। इश्वर का आशीर्वाद है, जो जीवन को नई राह दिखा देता।​

नाथद्वारा जाकर चरणों में शीश झुकाएं, गुणगान करें, एक नाम से भवसागर पार हो जाए। तकदीर बना ले ऐसी, उम्र गुजर जाए वो नगरी में, द्वार पर बुला लें। हर पल राधे जपो, मन की हर थकान मिट जाए। हमें बताते हैं कि सच्चा प्यार बिन बोले पुकार सुन लेता, जीवन रंगीन हो उठता। ऐसे दीवानेपन में डूब जाओ, दिल को सुकून मिले। आप सब पर इश्वर की कृपा बनी रहे, दिल को छू ले ऐसी भक्ति मिले। जय श्रीनाथ जी की!

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