कान्हा कारो कारो बरसाने वाली गोरी

कान्हा कारो कारो बरसाने वाली गोरी


कान्हा कारो कारो बरसाने वाली गोरी……..॥2
बरसाने वाली गोरी हमारी राधा गोरी……..॥2
नंद को कन्हिया वृषभान की किशोरी……..॥2
कान्हा कारो कारो बरसाने वाली गोरी……..॥2

कान्हा जी की बंसी करे दिल घायल……..॥2
मस्ती बिखेरे बजा के राधा पायल……..॥2
मोहन प्यारे रसिया, राधा गन्ने की पोरी……..॥2
कान्हा कारो कारो बरसाने वाली गोरी……..॥2

ग्यालो को संग लेके आए हैं बिहारी……..॥2
गोपियों के बीच सुहाए राधा प्यारी……..॥2
चंदा मेरो कान्हा और राधा है चकोरी……..॥2
कान्हा कारो कारो बरसाने वाली गोरी……..॥2

यमुना किनारे कभी रास रचावे……..॥2
खेलन को प्यारी संग बरसाने आवे……..॥2
छलिया है कन्हिया और लाडली जी भोरी……..॥2
कान्हा कारो कारो बरसाने वाली गोरी……..॥2

राधा जी है मिश्री और माखन मुरारी……..॥2
श्यामा जी है हाथ और कंगन गिरधारी……..॥2
भूलन त्यागी बृज में मचावे दोनों होरी……..॥2
कान्हा कारो कारो बरसाने वाली गोरी……..॥2

बरसाने वाली गोरी हमारी राधा गोरी……..॥2
नंद को कन्हिया वृषभान की किशोरी……..॥2
कान्हा कारो कारो बरसाने वाली गोरी……..॥2


Kanha Karo Radha Gori | Jigyasa | Krishna Janmashtami Ka No 1 Bhajan | कान्हा करो राधा गोरी

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Song : कान्हा करो राधा गोरी | Kanha Karo Radha Gori
Singer : Jigyasa ( Jiya )
Lyrics : Bhulan Tyagi
Music : Kuldeep Deepak
Poster : Jiya Creations ( 92050561068 )

राधा और कृष्ण का प्रेम ब्रज की आत्मा में रचा-बसा है। बरसाने की गोरी राधा अपनी सादगी, सुंदरता और निष्कलंक प्रेम के लिए जानी जाती हैं, वहीं कृष्ण की बंसी की मधुर धुन हर दिल को घायल कर देती है। जब कृष्ण अपनी बंसी बजाते हैं, तो राधा की पायल की मस्ती उसमें घुल जाती है, और पूरा ब्रज प्रेम और आनंद के रस में डूब जाता है। कृष्ण रसिया हैं, प्रेम के रंग में रंगे हुए, और राधा उस प्रेम की मिठास, जैसे गन्ने की कोर।

कृष्ण अपने ग्वाल-बालों के साथ जब गोपियों के बीच आते हैं, तो राधा की सुंदरता और प्रेम सबसे अलग और अनुपम दिखाई देती है। कृष्ण को चाँद कहा गया है, और राधा को चकोरी—जिसकी नजरें हमेशा अपने चाँद पर टिकी रहती हैं। यह प्रेम एक-दूसरे के बिना अधूरा है, दोनों का आकर्षण और समर्पण एक-दूसरे को पूर्णता देता है। यमुना के किनारे जब कृष्ण रास रचाते हैं, तो राधा संग खेलने के लिए बरसाने से आती हैं। कृष्ण की चंचलता और राधा की मासूमियत मिलकर ब्रज में प्रेम और उल्लास का अद्भुत वातावरण रच देते हैं। कृष्ण छलिया हैं, उनकी लीलाएँ रहस्य से भरी हैं, और राधा उस प्रेम में पूरी तरह डूबी हुई, निष्कलंक और भोली हैं।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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