कान्हा तेरे आगे खड़ा हूँ हाथ जोड़
कान्हा तेरे आगे खड़ा हूँ हाथ जोड़
कान्हा, तेरे आगे खड़ा हूँ हाथ जोड़,
विनती मेरी सुन लो, ओ मेरे नंदकिशोर।
हारे हुए को कान्हा, तुम हो जीताते,
भटके हुए को राह सदा दिखलाते।
मैं भी हार गया हूँ, देखो ना मेरी ओर,
विनती मेरी सुन लो, ओ मेरे नंदकिशोर।
महिमा सुनी है सबने दर की तेरी,
कब होगी पूरी कान्हा, इच्छा ये मेरी।
जब तक मेरी सुनो ना, जाऊं ना कहीं ओर,
विनती मेरी सुन लो, ओ मेरे नंदकिशोर।
क्या मैं बताऊँ तुमको? सब तो तुम्हें पता है,
हाल मेरा क्या तुमसे अब छुपा है?
कर दो इच्छा पूरी, तरसाओ ना अब और,
विनती मेरी सुन लो, ओ मेरे नंदकिशोर।
विनती मेरी सुन लो, ओ मेरे नंदकिशोर।
हारे हुए को कान्हा, तुम हो जीताते,
भटके हुए को राह सदा दिखलाते।
मैं भी हार गया हूँ, देखो ना मेरी ओर,
विनती मेरी सुन लो, ओ मेरे नंदकिशोर।
महिमा सुनी है सबने दर की तेरी,
कब होगी पूरी कान्हा, इच्छा ये मेरी।
जब तक मेरी सुनो ना, जाऊं ना कहीं ओर,
विनती मेरी सुन लो, ओ मेरे नंदकिशोर।
क्या मैं बताऊँ तुमको? सब तो तुम्हें पता है,
हाल मेरा क्या तुमसे अब छुपा है?
कर दो इच्छा पूरी, तरसाओ ना अब और,
विनती मेरी सुन लो, ओ मेरे नंदकिशोर।
कान्हा तेरे आगे खड़ा हूँ हाथ जोड़ #bankebihari #vrindavan #krishna #shyam #radhe #kanha #radheradhe
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Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
जीवन की कठिनाइयों और हार के क्षणों में, जब सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तब एकमात्र सहारा कृष्ण की शरण ही बनती है। उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े रहना, अपनी व्यथा और मन की बातें कहना, यह दर्शाता है कि हर समस्या का समाधान उन्हीं की कृपा में छिपा है। कृष्ण की महिमा और उनकी दया की कहानियाँ सब ओर प्रसिद्ध हैं, और मन में यही आशा रहती है कि कब उनकी कृपा दृष्टि प्राप्त होगी। उनके दरबार में खड़े होकर मनुष्य अपनी इच्छाओं और कष्टों को उनके सामने रखता है, क्योंकि उसे विश्वास है कि कृष्ण अंतर्यामी हैं—सब जानते हैं, फिर भी मन की बात कहे बिना चैन नहीं मिलता।
जब तक उनकी कृपा और आशीर्वाद नहीं मिलते, तब तक मन कहीं और नहीं जाता। कृष्ण के चरणों में समर्पण और प्रार्थना, जीवन को आशा और संबल देती है। उनके प्रति यह अटूट विश्वास है कि वे अपने भक्त की पुकार अवश्य सुनेंगे और उसकी इच्छा पूरी करेंगे। यह भावना कठिन समय में भी मनुष्य को धैर्य और साहस देती है, और उसे यह विश्वास दिलाती है कि कृष्ण की शरण में रहकर हर दुख और समस्या का समाधान संभव है।
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श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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