सुलझाओ मेरी उलझन मैं भटका भटका

सुलझाओ मेरी उलझन मैं भटका भटका फिरता हूं


सुलझाओ मेरी उलझन, मैं भटका-भटका फिरता हूँ,
संभालो ना मुझे आकर, सँभलकर क्यों मैं गिरता हूँ।
मिला है दर तेरा जब से, तुझे बस याद करता हूँ —
सुलझाओ मेरी उलझन...

तेरी ही आस बची मोहन, संभालो ना मुझे आकर,
मेरे मन में छवि तेरी है, तेरी ही धुन बसी मोहन।
हर लो मेरे ये आँसू, तुझे फरियाद करता हूँ —
सुलझाओ मेरी उलझन...

मैं पापी हूँ, मेरे कान्हा, मेरे तू पाप हर लेना,
करूँ सेवा सदा तेरी, यही वरदान मुझे देना।
रख लेना चरणों में मुझको, अकेले में मैं डरता हूँ —
सुलझाओ मेरी उलझन...

तू ही जाने हाल मेरा, छुपा क्या तुझसे बनवारी,
थामा तूने हाथ मेरा, शिवो गई तुझसे ही हारी।
बुला लो अब वृंदावन में, यहाँ पल-पल मैं मरता हूँ —
सुलझाओ मेरी उलझन...


सुलझाओ मेरी उलझन Suljhao Meri Uljhan | Inder Kamboz | inderkamboz_official Bhagti Song |श्याम भजन

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Song. SULJHAO MERI ULJHAN
Singer. INDER KAMBOZ
Lyrics. SHIVOO FARIDKOT
Music. AMIT KESHAV

जीवन की कठिनाइयों और उलझनों में जब रास्ता समझ नहीं आता, तब मन एकमात्र सहारा कृष्ण को ही मानता है। बार-बार गिरने और भटकने के बाद भी, आशा बस उन्हीं की शरण में टिकती है। उनके दर पर आकर मन को शांति और विश्वास मिलता है, और हर परिस्थिति में उन्हीं को याद करने से जीवन में सहारा मिलता है। मन में कृष्ण की छवि और उनकी धुन बस जाती है, जिससे हर दुख और पीड़ा में भी एक उम्मीद बनी रहती है। आंसुओं और फरियादों का बोझ भी उन्हीं के सामने हल्का होता है, क्योंकि विश्वास है कि वे ही हर समस्या का समाधान कर सकते हैं।

अपने दोषों और कमजोरियों को स्वीकार करते हुए मन यही चाहता है कि कृष्ण अपने चरणों में स्थान दें और सेवा का अवसर दें। अकेलेपन और डर के क्षणों में, उनका साथ ही सुरक्षा और सुकून देता है। जीवन के हर हाल और मन की हर बात कृष्ण जानते हैं, उनसे कुछ भी छुपा नहीं है। जब संसार में कहीं चैन नहीं मिलता, तब वृंदावन की पुकार उठती है—जहां हर क्षण कृष्ण की उपस्थिति का अनुभव हो सके। यही भावना है कि जीवन की हर उलझन, हर डर और हर दर्द का समाधान कृष्ण की कृपा और उनकी शरण में ही है।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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