नमन है आपको प्रभुजी मेरी बाधा को हर लेना
नमन है आपको प्रभुजी मेरी बाधा को हर लेना
प्रार्थना : मेरी बाधा को हर लेना
नमन है आपको प्रभु जी,
मेरी बाधा को हर लेना।
न ज्ञानी हूँ, न ध्यानी हूँ,
मेरे अज्ञान हर लेना।।
हमारे पाप को हर लो,
प्रभु संताप को हर लो।
हमारे दंभ को हर लो,
मुझे अपना बना लेना।
नमन है आपको प्रभु जी...
सदा सेवा करूँ तन से,
करूँ भक्ति सदा मन से।
करूँ मैं प्रेम सब जन से,
यही वरदान दे देना।
नमन है आपको प्रभु जी...
कभी अनुचित नहीं बोलूँ,
सदा रस प्रेम का घोलूँ।
सभी के ग़म को मैं हर लूँ,
कान्त को ज्ञान यह देना।
नमन है आपको प्रभु जी...
नमन है आपको प्रभु जी,
मेरी बाधा को हर लेना।
न ज्ञानी हूँ, न ध्यानी हूँ,
मेरे अज्ञान हर लेना।।
हमारे पाप को हर लो,
प्रभु संताप को हर लो।
हमारे दंभ को हर लो,
मुझे अपना बना लेना।
नमन है आपको प्रभु जी...
सदा सेवा करूँ तन से,
करूँ भक्ति सदा मन से।
करूँ मैं प्रेम सब जन से,
यही वरदान दे देना।
नमन है आपको प्रभु जी...
कभी अनुचित नहीं बोलूँ,
सदा रस प्रेम का घोलूँ।
सभी के ग़म को मैं हर लूँ,
कान्त को ज्ञान यह देना।
नमन है आपको प्रभु जी...
प्रार्थना : मेरी बाधा को हर लेना/रचना : दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज/स्वर : आलोक जी ।
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विनम्र आत्मसमर्पण और गहन आस्था का भाव है, जिसमें भक्त प्रभु के चरणों में सिर झुकाकर अपने जीवन की सभी बाधाओं, अज्ञान, पाप, संताप और अहंकार को दूर करने की याचना करता है। भक्त स्वीकार करता है कि उसमें न तो ज्ञान है, न ध्यान की क्षमता, और न ही वह सेवा या पूजा की विधि जानता है, फिर भी उसकी एकमात्र इच्छा है कि प्रभु उसे अपना बना लें और उसे सच्ची भक्ति, सेवा और प्रेम का वरदान दें। यह प्रार्थना केवल व्यक्तिगत मुक्ति की नहीं, बल्कि जीवन में प्रेम, विनम्रता, शुद्धता और दूसरों के दुख हरने की शक्ति की भी कामना है—कि कभी कोई अनुचित वचन न निकले, मन में सदा प्रेम और सेवा का भाव बना रहे, और प्रभु की कृपा से जीवन पवित्र, शांत और सार्थक बन जाए। इसमें वही भाव है जो बिहारी के प्रसिद्ध दोहे "मेरी भव बाधा हरौ..." में झलकता है, जहाँ भक्त अपने सांसारिक कष्टों और अज्ञान को प्रभु की करुणा से दूर करने की प्रार्थना करता है
प्रार्थना : मेरी बाधा को हर लेना ।
भजन रचना : दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।
स्वर : आलोक जी ।
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प्रार्थना : मेरी बाधा को हर लेना ।
भजन रचना : दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।
स्वर : आलोक जी ।
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Author - Saroj Jangir
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