पाके प्रेम वाली झांझर पैरीं मैं वृन्दावन भजन

पाके प्रेम वाली झांझर पैरीं मैं वृन्दावन नचदी फिरां भजन

पा के, प्रेम वाली, हो पा के, प्रेम वाली,
पा के, प्रेम वाली, झांझर पैरीं,
मैं वृंदावन, नचदी फिरां।
हो, नचदी फिरां*, मैं टप्पदी फिरां
हो पा के, प्रेम वाली, झांझर पैरीं.......

प्रेम, वाली झांझर, टूटे कदी ना।
श्याम, पिया मेरा, रूसे कदी ना॥
हो कदी रूसे, हो कदी रूसे,
हो कदी रूसे, ते मैं ही मनावां,
मैं वृंदावन, नचदी फिरां,
हो पा के, प्रेम वाली.........

राधा, जी है, प्रेम दी सागर।
श्याम, सुंदर मेरे, नटवर नागर॥
एहना, दोना तों मैं, हो एहना, दोना तों मैं,
एहना, दोना तों मैं, वारी वारी जावां,
मैं वृंदावन, नचदी फिरां,
हो पा के, प्रेम वाली........

एह, वृंदावन, प्रेम दी नगरी।
एथे, प्रेम दी, गंगा वगदी॥
मैं ते, रज्ज रज्ज, हो मैं ते, रज्ज रज्ज,
मैं ते, रज्ज रज्ज, डुबकियां लावां,
मैं वृंदावन, नचदी फिरां,
हो पा के, प्रेम वाली........

पैरां, विच घुंघरू, हथ खड़कलां।
नच, नच के सारे, पावण धमालां॥
मैं वी, वीरां वांगू, मैं वी, वीरां वांगू,
मैं वी, वीरां वांगू, गिद्धा पावां,
मैं वृंदावन, नचदी फिरां,
हो पा के, प्रेम वाली.......
 
ਪਾ ਕੇ, ਪ੍ਰੇਮ ਵਾਲੀ, ਹੋ ਪਾ ਕੇ, ਪ੍ਰੇਮ ਵਾਲੀ,
ਪਾ ਕੇ, ਪ੍ਰੇਮ ਵਾਲੀ, ਝਾਂਜਰ ਪੈਰੀਂ,
ਮੈਂ ਵ੍ਰਿੰਦਾਵਨ, ਨੱਚਦੀ ਫਿਰਾਂ l
ਹੋ, ਨੱਚਦੀ ਫਿਰਾਂ*, ਮੈਂ ਟੱਪਦੀ ਫਿਰਾਂ ll
ਹੋ ਪਾ ਕੇ, ਪ੍ਰੇਮ ਵਾਲੀ, ਝਾਂਜਰ ਪੈਰੀਂ.......

ਪ੍ਰੇਮ, ਵਾਲੀ ਝਾਂਜਰ, ਟੁੱਟੇ ਕਦੀ ਨਾ l
ਸ਼ਿਆਮ, ਪੀਆ ਮੇਰਾ, ਰੁੱਸੇ ਕਦੀ ਨਾ ll
ਹੋ ਕਦੀ ਰੁੱਸੇ, ਹੋ ਕਦੀ ਰੁੱਸੇ,
ਹੋ ਕਦੀ ਰੁੱਸੇ, ਤੇ ਮੈਂ ਹੀ ਮਨਾਵਾਂ,
ਮੈਂ ਵ੍ਰਿੰਦਾਵਨ, ਨੱਚਦੀ ਫਿਰਾਂ,
ਹੋ ਪਾ ਕੇ, ਪ੍ਰੇਮ ਵਾਲੀ.........

ਰਾਧਾ, ਜੀ ਹੈ, ਪ੍ਰੇਮ ਦੀ ਸਾਗਰ l
ਸ਼ਿਆਮ, ਸੁੰਦਰ ਮੇਰੇ, ਨਟਵਰ ਨਾਗਰ ll
ਏਹਨਾਂ, ਦੋਨਾਂ ਤੋਂ ਮੈਂ, ਹੋ ਏਹਨਾਂ, ਦੋਨਾਂ ਤੋਂ ਮੈਂ,
ਏਹਨਾਂ, ਦੋਨਾਂ ਤੋਂ ਮੈਂ, ਵਾਰੀ ਵਾਰੀ ਜਾਵਾਂ,
ਮੈਂ ਵ੍ਰਿੰਦਾਵਨ, ਨੱਚਦੀ ਫਿਰਾਂ,
ਹੋ ਪਾ ਕੇ, ਪ੍ਰੇਮ ਵਾਲੀ........

ਏਹ, ਵ੍ਰਿੰਦਾਵਨ, ਪ੍ਰੇਮ ਦੀ ਨਗਰੀ l
ਏਥੇ, ਪ੍ਰੇਮ ਦੀ, ਗੰਗਾ ਵੱਗਦੀ ll
ਮੈਂ ਤੇ, ਰੱਜ ਰੱਜ, ਹੋ ਮੈਂ ਤੇ, ਰੱਜ ਰੱਜ,
ਮੈਂ ਤੇ, ਰੱਜ ਰੱਜ, ਡੁੱਬਕੀਆਂ ਲਾਵਾਂ,
ਮੈਂ ਵ੍ਰਿੰਦਾਵਨ, ਨੱਚਦੀ ਫਿਰਾਂ,
ਹੋ ਪਾ ਕੇ, ਪ੍ਰੇਮ ਵਾਲੀ........

ਪੈਰਾਂ, ਵਿੱਚ ਘੁੰਘਰੂ, ਹੱਥ ਖੜ੍ਹਕਲਾਂ l
ਨੱਚ, ਨੱਚ ਕੇ ਸਾਰੇ, ਪਾਉਣ ਧਮਾਲਾਂ ll
ਮੈਂ ਵੀ, ਵੀਰਾਂ ਵਾਂਗੂ, ਮੈਂ ਵੀ, ਵੀਰਾਂ ਵਾਂਗੂ,
ਮੈਂ ਵੀ, ਵੀਰਾਂ ਵਾਂਗੂ, ਗਿੱਧਾ ਪਾਵਾਂ
ਮੈਂ ਵ੍ਰਿੰਦਾਵਨ, ਨੱਚਦੀ ਫਿਰਾਂ,
ਹੋ ਪਾ ਕੇ, ਪ੍ਰੇਮ ਵਾਲੀ....... ।



Vrindavan nachdi phiran: Didi Aarti Sharma

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Singer:Didi aarti sharma ji
Album: Komal Charan Kishore ke
Label: Chandrika Music Co.
 
प्रेम वाली झांझर पैरों में बजती है तो वृंदावन की गलियाँ खुद नाचने लगती हैं। राधा जी का मन प्रेम का सागर है, और श्याम सुंदर नटवर नागर उसमें डुबकी लगाते हैं। दोनों की यह लीला ऐसी है कि बार-बार वारी-वारी जाती है, मन नहीं थकता। झांझर कभी टूटती नहीं, क्योंकि श्याम पिया कभी रूठते नहीं। अगर कभी रूठ भी जाएँ तो मनाने का आनंद ही अलग है – बस पुकारो और वे मुस्कुराकर पास आ जाते हैं। वृंदावन प्रेम की नगरी है, जहाँ हर कण में प्रेम की गंगा बहती रहती है। उसमें डुबकियाँ लगाते हुए सारे दुख बह जाते हैं, और बस खुशी की लहरें उठती रहती हैं।

पैरों में घुंघरू, हाथों में खड़ताल, नाच-नाचकर धमाल मचाते हैं जैसे कोई वीर गिद्धा पा रहा हो। यह नाच सिर्फ थिरकन नहीं, बल्कि प्रेम की अभिव्यक्ति है जो सारे बंधन तोड़ देती है। वृंदावन में जो भी रम जाता है, वह टप्प-टप्प नाचता फिरता है, क्योंकि यहाँ प्रेम वाली झांझर की धुन कभी थमती नहीं। मन यही कहता रहता है कि बस इसी नगरी में रहना है, इसी प्रेम में डूबे रहना है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कृष्ण जी की। 
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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