सूर्य प्रातः स्मरणम मंत्र अर्थ महत्त्व
सूर्य प्रातः स्मरणम मंत्र जानिये अर्थ महत्त्व और फायदे
प्रातः स्मरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यं श्लोक सूर्य देव की महिमा का वर्णन करता है। इसमें सूर्य देव के रूप, उनके मंडल, और उनके द्वारा उत्पन्न किरणों की महिमा का उल्लेख है। यह श्लोक सूर्य देव की अचिन्त्य और ब्रह्म स्वरूपता की पुष्टि करता है।
इस श्लोक का नियमित पाठ करने से भक्तों को सर्वव्याधि से मुक्ति मिलती है और वे परम सुख की प्राप्ति करते हैं।
इस श्लोक का नियमित पाठ करने से भक्तों को सर्वव्याधि से मुक्ति मिलती है और वे परम सुख की प्राप्ति करते हैं।
प्रातः स्मरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यं
रूपं हि मण्डलमृचोऽथ तनुर्यजूंषि ।
सामानि यस्य किरणाः प्रभवादिहेतुं
ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यमचिन्त्यरूपम् ॥ १॥
प्रातर्नमामि तरणिं तनुवाङ्मनोभि-
र्ब्रह्मेन्द्रपूर्वकसुरैर्नुतमर्चितं च ।
वृष्टिप्रमोचनविनिग्रहहेतुभूतं
त्रैलोक्यपालनपरं त्रिगुणात्मकं च ॥ २॥
प्रातर्भजामि सवितारमनन्तशक्तिं
पापौघशत्रुभयरोगहरं परं च ।
तं सर्वलोककलनात्मककालमूर्तिं
गोकण्ठबन्धनविमोचनमादिदेवम् ॥ ३॥
श्लोकत्रयमिदं भानोः प्रातः प्रातः पठेत्तु यः ।
स सर्वव्याधिनिर्मुक्तः परं सुखमवाप्नुयात् ॥ ४॥
रूपं हि मण्डलमृचोऽथ तनुर्यजूंषि ।
सामानि यस्य किरणाः प्रभवादिहेतुं
ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यमचिन्त्यरूपम् ॥ १॥
प्रातर्नमामि तरणिं तनुवाङ्मनोभि-
र्ब्रह्मेन्द्रपूर्वकसुरैर्नुतमर्चितं च ।
वृष्टिप्रमोचनविनिग्रहहेतुभूतं
त्रैलोक्यपालनपरं त्रिगुणात्मकं च ॥ २॥
प्रातर्भजामि सवितारमनन्तशक्तिं
पापौघशत्रुभयरोगहरं परं च ।
तं सर्वलोककलनात्मककालमूर्तिं
गोकण्ठबन्धनविमोचनमादिदेवम् ॥ ३॥
श्लोकत्रयमिदं भानोः प्रातः प्रातः पठेत्तु यः ।
स सर्वव्याधिनिर्मुक्तः परं सुखमवाप्नुयात् ॥ ४॥
Surya Prataha Smaranam 11 Times With Lyrics | सूर्य प्रातः स्मरणम | Surya Dev Stotram | Rajshri Soul
Language : Sanskrit
Lyrics : Traditional
Composer : Tushar Pargaonkar
Artist : Susmirata Dawalkar
Lyrics : Traditional
Composer : Tushar Pargaonkar
Artist : Susmirata Dawalkar
