जय जय श्री राधे जू मैं शरण तिहारी भजन
जय जय श्री राधे जू मैं शरण तिहारी भजन
जय जय श्री राधे जू मैं शरण तिहारी
लोचन आरती जाऊँ बलिहारी
जय जय....
पीत पिताम्बंर ओड़े निली सारी
सीस पे सैंंदूर जाऊँ बलिहारी
जय जय....
रतंन सिंहासन बैठे श्री राधे
आरती करें हम पिये संग जोरी
जय जय....
झलमल झलमल मानीक मोती
अब लख़ मुनि मोहे पिये संग जोरी
जय जय....
श्री राधे पद पकंज भगती की आशा
दास मनोहर करत भरोसा
जय जय श्री राधे जू मैं शरण तिहारी
लोचन आरती जाऊँ बलिहारी
जय जय....
लोचन आरती जाऊँ बलिहारी
जय जय....
पीत पिताम्बंर ओड़े निली सारी
सीस पे सैंंदूर जाऊँ बलिहारी
जय जय....
रतंन सिंहासन बैठे श्री राधे
आरती करें हम पिये संग जोरी
जय जय....
झलमल झलमल मानीक मोती
अब लख़ मुनि मोहे पिये संग जोरी
जय जय....
श्री राधे पद पकंज भगती की आशा
दास मनोहर करत भरोसा
जय जय श्री राधे जू मैं शरण तिहारी
लोचन आरती जाऊँ बलिहारी
जय जय....
Baba Khetarpal Ji Da Gulam I SUKHBIR RANA I Punjabi Devotional Song I Full Audio Song
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Punjabi Devotional Song: Baba Khetarpal Ji Da Gulam
Singer: Sukhbir Rana
Music Director: Kawaljeet Bablu
Lyricist: Randeep Gill
Album: Baba Khetarpal Ji Da Gulam
Music Label: T-Series
Singer: Sukhbir Rana
Music Director: Kawaljeet Bablu
Lyricist: Randeep Gill
Album: Baba Khetarpal Ji Da Gulam
Music Label: T-Series
जब जय जय श्री राधे की यह आरती उठती है, तो लगता है मानो दिल खुद‑ब‑खुद अगरबत्ती जला रहा हो—लोचनों की आरती से उसकी चमक और भी तेज़ हो जाती है। पीले पिताम्बर और नीली साड़ी, सिंदूर से सजी शोभा, रत्नों से जड़ा सिंहासन—ये सब रूप देखकर नहीं, ये रूप देखते‑देखते मन प्रेम में इतना डूब जाता है कि सारा जग हट जाता है, बस आँखों के सामने वही राधे रानी रह जाती हैं।
रत्नों और मोतियों की झलक भी असल में राधे के चरण कमल का ही रूप है, जो भक्ति की हर आशा और आस में छुपा रहता है। भगत मन ही मन यही भरोसा बोलता है कि जो राधे के चरणों में शरण ले लेता है, उसकी प्यास कभी बाकी नहीं रहती, आँखें भर जाती हैं, दिल भर जाता है, जीवन भी भर जाता है। इसी भाव से लगता है कि राधे की शरण ही असली आस्था है, बस उन्हें याद करने से ही आँखों की आरती चालू हो जाती है और जीवन स्वयं बलिहारी हो जाता है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राधे जी की।
रत्नों और मोतियों की झलक भी असल में राधे के चरण कमल का ही रूप है, जो भक्ति की हर आशा और आस में छुपा रहता है। भगत मन ही मन यही भरोसा बोलता है कि जो राधे के चरणों में शरण ले लेता है, उसकी प्यास कभी बाकी नहीं रहती, आँखें भर जाती हैं, दिल भर जाता है, जीवन भी भर जाता है। इसी भाव से लगता है कि राधे की शरण ही असली आस्था है, बस उन्हें याद करने से ही आँखों की आरती चालू हो जाती है और जीवन स्वयं बलिहारी हो जाता है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राधे जी की।
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