अरे हरी भज हरी भज हिरा परख ले भजन
अरे हरी भज हरी भज हिरा परख ले भजन
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक रा,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
ए इंद्र घटाले सतगुरु आया,
अमृत बूंदां हद लुटी,
त्रिवेणी रा रंग महल में,
हंस लेलालो हद लुटी,
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
इन काया में पांच चोर हैं,
जिन री पकड़ ले सिर चोटी,
पांचों ने पकड़ पच्चीस वश कर ले,
जद जानूं थारी रजपूती,
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
डावी इड़ा जीमन पिंगला,
सोजो सुषुम्ना घर बूटी,
एड़ा भाव भक्ति रा राखे,
दुखड़ो दूर है दस गुटी,
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
नेम धरम री जात बनावो,
बैठ चलो जती सती पापी,
जीव तो घणो दुख देवे,
एड़ी मना री करो मती,
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
अरे न कोई रैणा न कोई कहना,
कोई सुन ले सुन कोठी,
गुरु खिमजी रा माली लिखमोजी बोले,
आय भजन री घर कुटी,
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक रा,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक रा,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
ए इंद्र घटाले सतगुरु आया,
अमृत बूंदां हद लुटी,
त्रिवेणी रा रंग महल में,
हंस लेलालो हद लुटी,
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
इन काया में पांच चोर हैं,
जिन री पकड़ ले सिर चोटी,
पांचों ने पकड़ पच्चीस वश कर ले,
जद जानूं थारी रजपूती,
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
डावी इड़ा जीमन पिंगला,
सोजो सुषुम्ना घर बूटी,
एड़ा भाव भक्ति रा राखे,
दुखड़ो दूर है दस गुटी,
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
नेम धरम री जात बनावो,
बैठ चलो जती सती पापी,
जीव तो घणो दुख देवे,
एड़ी मना री करो मती,
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
अरे न कोई रैणा न कोई कहना,
कोई सुन ले सुन कोठी,
गुरु खिमजी रा माली लिखमोजी बोले,
आय भजन री घर कुटी,
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
अरे हरी भज, हरी भज हीरा परख ले,
समझ राख मन मजबूती,
साचा सुमिरन करो मालिक रा,
और वार्ता सब झूठी रे हा।।
श्याम पालीवाल ll हरी भज हरी भज हिरा परक ले 2019 नया भजन
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