माएं बूहे खोल कि अंदर औना चाहुंदा हां भजन
माएं बूहे खोल कि अंदर औना चाहुंदा हां भजन
माएं बूहे खोल कि,
माएं बूहे खोल कि अंदर औना चाहुंदा हां,तेनु अपने दिल दा हाल सुनाउना चाहुंदे हां || नवरात्रि स्पेशल ||
अंदर औना चाहुंदा हां,
तेनु अपने दिल दा हाल,
सुनाउना चाहुंदे हां,
तेरे चरना दे विच शीश,
झुकाना चाहुंदे हां,
माएं बूहे खोल कि,
अंदर औना चाहुंदा हां।
तेरे दर्शन दी माँ,
कद आस लगाई ऐ,
आसा रानी आसा दी,
मैं ज्योत जगाई ऐ,
झंडियाँ वाली दर ते,
अलख ज्गाउना चाहुंदे हां,
माएं बूहे खोल कि,
अंदर औना चाहुंदा हां।
एक वार ते मन ले माँ,
अरदास गरीबा दी,
एक वार ते पूरी करदे,
आस गरीबा दी,
असी वी तेरे दर ते,
छतर चढ़ाऊंना चाहुंदे हां,
माएं बूहे खोल कि,
अंदर औना चाहुंदा हां।
तेरे भवन सुनहरी,
चोला लाल भवानी माँ,
शेर तेरा अलबेला,
सोहनी चाल भवानी माँ,
शेर सवारी तेरा,
दर्शन पाना चाहुंदे हां,
माएं बूहे खोल कि,
अंदर औना चाहुंदा हां।
तेरा द्वारा मल के बेठे,
भगत प्यारे माँ,
न्च्दे गाउंदे ढोल व्जौंदे,
रल के सारे माँ,
असी भी चंचल दे नाल,
भेंटा गाउनी चाहुंदे हां,
माएं बूहे खोल कि,
अंदर औना चाहुंदा हां।
तेनु अपने दिल दा हाल,
सुनाउना चाहुंदे हां,
तेरे चरना दे विच शीश,
झुकाना चाहुंदे हां,
माएं बूहे खोल कि,
अंदर औना चाहुंदा हां।
तेरे दर्शन दी माँ,
कद आस लगाई ऐ,
आसा रानी आसा दी,
मैं ज्योत जगाई ऐ,
झंडियाँ वाली दर ते,
अलख ज्गाउना चाहुंदे हां,
माएं बूहे खोल कि,
अंदर औना चाहुंदा हां।
एक वार ते मन ले माँ,
अरदास गरीबा दी,
एक वार ते पूरी करदे,
आस गरीबा दी,
असी वी तेरे दर ते,
छतर चढ़ाऊंना चाहुंदे हां,
माएं बूहे खोल कि,
अंदर औना चाहुंदा हां।
तेरे भवन सुनहरी,
चोला लाल भवानी माँ,
शेर तेरा अलबेला,
सोहनी चाल भवानी माँ,
शेर सवारी तेरा,
दर्शन पाना चाहुंदे हां,
माएं बूहे खोल कि,
अंदर औना चाहुंदा हां।
तेरा द्वारा मल के बेठे,
भगत प्यारे माँ,
न्च्दे गाउंदे ढोल व्जौंदे,
रल के सारे माँ,
असी भी चंचल दे नाल,
भेंटा गाउनी चाहुंदे हां,
माएं बूहे खोल कि,
अंदर औना चाहुंदा हां।
माएं बूहे खोल कि अंदर औना चाहुंदा हां,तेनु अपने दिल दा हाल सुनाउना चाहुंदे हां || नवरात्रि स्पेशल ||
स्वर :- गोपाल मंडल
माँ बूहे खोल दो, अंदर आना चाहता हूँ। दिल का हाल सुनाना है, चरणों में शीश झुकाना। दर्शन की आस लगाई, ज्योत जलाई रानी। झंडियाँ वाली दर पर अलख जगाना। गरीब की अरदास पूरी कर दो एक बार। छतर चढ़ाना चाहते दर पर। सुनहरी भवन लाल चोला भवानी माँ, शेर सवारी सोहनी चाल। साधक पुकारे तो इश्वर का आशर्वाद बरसता।
भगत प्यारे मल के बैठे गाते-नाचते, ढोल बजाते रल के। चंचल के साथ भेंट गानी। तेरे द्वारा पहुँचने को तड़पे मन। जैसे कोई बच्चा माँ की गोद रो रो माँगे, वैसे प्रेम जगा लो। दर खुल जाए तो सुकून मिले। आओ, पुकारो दिल से। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री भवानी जी की।
भगत प्यारे मल के बैठे गाते-नाचते, ढोल बजाते रल के। चंचल के साथ भेंट गानी। तेरे द्वारा पहुँचने को तड़पे मन। जैसे कोई बच्चा माँ की गोद रो रो माँगे, वैसे प्रेम जगा लो। दर खुल जाए तो सुकून मिले। आओ, पुकारो दिल से। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री भवानी जी की।