मनुष्य जनम अनमोल रे मिट्टी में ना रोल भजन
मनुष्य जनम अनमोल रे मिट्टी में ना रोल भजन
मनुष्य जनम अनमोल रे, मिट्टी में ना रोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं रे, कभी नहीं रे, कभी नहीं रे।।
तू सत्संग में आया कर, गीत प्रभु के गाया कर,
सांझ सवेरे बैठ के बंदे, गीत प्रभु के गाया कर,
नहीं लगता कुछ मोल रे, मिट्टी में ना रोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं रे।।
तू है बुदबुद पानी का, मत कर जोर जवानी का,
समझ संभल के कदम रखो, पता नहीं जिंदगानी का,
सबसे मीठा बोल रे, मिट्टी में ना रोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं रे।।
मतलब का संसार है, इसका क्या ऐतबार है,
संभल संभल के कदम रखो, फूल नहीं अंगारे हैं,
मन की आंखें खोल रे, मिट्टी में ना रोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं रे।।
मनुष्य जनम अनमोल रे, मिट्टी में ना रोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं रे।।
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं रे, कभी नहीं रे, कभी नहीं रे।।
तू सत्संग में आया कर, गीत प्रभु के गाया कर,
सांझ सवेरे बैठ के बंदे, गीत प्रभु के गाया कर,
नहीं लगता कुछ मोल रे, मिट्टी में ना रोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं रे।।
तू है बुदबुद पानी का, मत कर जोर जवानी का,
समझ संभल के कदम रखो, पता नहीं जिंदगानी का,
सबसे मीठा बोल रे, मिट्टी में ना रोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं रे।।
मतलब का संसार है, इसका क्या ऐतबार है,
संभल संभल के कदम रखो, फूल नहीं अंगारे हैं,
मन की आंखें खोल रे, मिट्टी में ना रोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं रे।।
मनुष्य जनम अनमोल रे, मिट्टी में ना रोल रे,
अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं रे।।
Manushya Janm Anmol re || मनुष्य जन्म अनमोल रे || Kanhaiya Agiwal Live
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मानव जीवन एक अनमोल अवसर है; यह मिट्टी जैसा क्षणिक है और इसे व्यर्थ बहाकर खो देना भारी क्षति है। जवानी की रफ्तार में या दुनियादारी के चक्कर में कदम लड़खड़ाने से बचना जरूरी है, क्योंकि कल का भरोसा नहीं मिलता। इसलिए सत्संग में बैठना, प्रभु के गीत गाना और अंदर की सुनी हुई आवाज़ को सुनना सबसे अहम कदम है। जब जीवन की हर साँस का महत्व समझ में आ जाता है, तो दिखावटी दौड़-पिछत को छोड़कर सच्ची ओर बढ़ने का मन बनता है।
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Admin - Saroj Jangir
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