सुनो चेलों करलो तैयारी रे वा बाछल याद करे
सुनो चेलों करलो तैयारी रे वा बाछल याद करे
सुनो चेलों कर लो तैयारी रे,
एक दुखिया आस में म्हारी रे,
चालां बागड़ देश,
वो बाछल याद कर।
अरे ठाल्यो चिमटा हाथा में,
कुछ धरया नहीं स बाता में,
धरो कांदे, कम्बल, खेस,
वा बाछल याद कर।
जो हरी न लिख दी रेख में,
वा मिलना चाहाव भेष में,
कर धूणे आदेश,
वा बाछल याद कर।
मेरे तन न भेदन लागी,
मिलने की इच्छा जागी,
मैं खो दयू सारे क्लेश,
वा बाछल याद कर।
शुशीला रात जगा देगी,
नारायण न बुला लेगी,
गुण गावे खास मुकेश,
वा बाछल याद कर।
सुनो चेलों कर लो तैयारी रे,
एक दुखिया आस में म्हारी रे,
चालां बागड़ देश,
वो बाछल याद कर।
एक दुखिया आस में म्हारी रे,
चालां बागड़ देश,
वो बाछल याद कर।
अरे ठाल्यो चिमटा हाथा में,
कुछ धरया नहीं स बाता में,
धरो कांदे, कम्बल, खेस,
वा बाछल याद कर।
जो हरी न लिख दी रेख में,
वा मिलना चाहाव भेष में,
कर धूणे आदेश,
वा बाछल याद कर।
मेरे तन न भेदन लागी,
मिलने की इच्छा जागी,
मैं खो दयू सारे क्लेश,
वा बाछल याद कर।
शुशीला रात जगा देगी,
नारायण न बुला लेगी,
गुण गावे खास मुकेश,
वा बाछल याद कर।
सुनो चेलों कर लो तैयारी रे,
एक दुखिया आस में म्हारी रे,
चालां बागड़ देश,
वो बाछल याद कर।
गुरु गोरखनाथ भजन 2025 - वा बाछल याद कर - Latest Gorakhnath Bhajan - मुकेश शर्मा - Latest Bhakti Song
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मन में बाछल माता की याद और उनके दर्शन की तीव्र इच्छा जागी है, जो भक्तों को बागड़ देश की ओर खींचती है। चेलों को तैयार होने की पुकार है, क्योंकि एक दुखी मन उनकी कृपा की आस लिए उनके पास पहुँचना चाहता है। सादगी से चिमटा और कम्बल-खेस साथ ले, उनके धुने पर आदेश लेने की तड़प है। मन में कोई भेदभाव नहीं, केवल उनकी भक्ति में डूबने की चाह है, जो सारे क्लेश मिटा देती है। उनकी कृपा के बिना जीवन की रेखा अधूरी है, और उनके भेष में मिलन की आशा मन को जगा रही है। रात-रात जागकर उनके गुण गाए जाते हैं, और भक्त का मन उनकी याद में खोया रहता है।
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तू है थानेदार सांवरे करले गिरफ्तार
चाँदी का पालना लायो मारा सेठ जी भजन
बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
मन में बाछल माता की याद और उनके दर्शन की तीव्र इच्छा जागी है, जो भक्तों को बागड़ देश की ओर खींचती है। चेलों को तैयार होने की पुकार है, क्योंकि एक दुखी मन उनकी कृपा की आस लिए उनके पास पहुँचना चाहता है। सादगी से चिमटा और कम्बल-खेस साथ ले, उनके धुने पर आदेश लेने की तड़प है। मन में कोई भेदभाव नहीं, केवल उनकी भक्ति में डूबने की चाह है, जो सारे क्लेश मिटा देती है। उनकी कृपा के बिना जीवन की रेखा अधूरी है, और उनके भेष में मिलन की आशा मन को जगा रही है। रात-रात जागकर उनके गुण गाए जाते हैं, और भक्त का मन उनकी याद में खोया रहता है।
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सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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