दुखियों को तारने वाले ऐसे मिल पाते हैं कहाँ
दुखियों को तारने वाले ऐसे मिल पाते हैं कहाँ
दुखियों को तारने वाले,
ऐसे मिल पाते हैं कहाँ?
कैसे गाऊँ उनकी गाथा,
जो प्राणी हैं इतने महाँ।।
जो बिछुड़ते राह दिखाता,
जो दुखियों के कष्ट मिटाता,
जो दुखियों का बने सहारा,
वो सबका होता है प्यारा।
ऐसे दीनों के रखवाले,
ऐसे मिल पाते हैं कहाँ?
दुखियों को तारने वाले...।।
जो किसी का अहित न करता,
सबसे ही जो प्रेम है करता,
जो मिले खुशी से सबसे,
जिसने प्रेम किया है जग से।
प्रेमी-निर्मल हृदय वाले,
ऐसे मिल पाते हैं कहाँ?
दुखियों को तारने वाले...।।
सेवा का जो मर्म समझता,
दुख हरना धर्म समझता,
प्रभु को देखे सबके अंदर,
जिसमें भक्ति का है समंदर।
कान्त प्रभु को पाने वाले,
ऐसे मिल पाते हैं कहाँ?
दुखियों को तारने वाले...।।
ऐसे मिल पाते हैं कहाँ?
कैसे गाऊँ उनकी गाथा,
जो प्राणी हैं इतने महाँ।।
जो बिछुड़ते राह दिखाता,
जो दुखियों के कष्ट मिटाता,
जो दुखियों का बने सहारा,
वो सबका होता है प्यारा।
ऐसे दीनों के रखवाले,
ऐसे मिल पाते हैं कहाँ?
दुखियों को तारने वाले...।।
जो किसी का अहित न करता,
सबसे ही जो प्रेम है करता,
जो मिले खुशी से सबसे,
जिसने प्रेम किया है जग से।
प्रेमी-निर्मल हृदय वाले,
ऐसे मिल पाते हैं कहाँ?
दुखियों को तारने वाले...।।
सेवा का जो मर्म समझता,
दुख हरना धर्म समझता,
प्रभु को देखे सबके अंदर,
जिसमें भक्ति का है समंदर।
कान्त प्रभु को पाने वाले,
ऐसे मिल पाते हैं कहाँ?
दुखियों को तारने वाले...।।
भजन : दुःखियों को तारने वाले //दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज
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भजन रचना एवं सुमधुर स्वर :-
दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।
दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।
संसार में वही महान आत्माएँ दुर्लभ होती हैं, जिनके हृदय में करुणा और सेवा का भाव उमड़ता है। वे हर दुःखी के सहारा बनते हैं, हर भटके को राह दिखाते हैं और अपने स्नेह से दूसरों का जीवन आलोकित करते हैं। उनका अस्तित्व किसी दीपक की तरह है, जो स्वयं जलकर दूसरों को उजियारा देता है। ऐसे व्यक्तित्व से मिलना स्वयं ईश्वर की अनुभूति के समान है, क्योंकि उनके स्पर्श से निराश आत्मा में आशा जाग उठती है और पीड़ित हृदय को संबल मिल जाता है।
ऐसा चरित्र जो कभी दूसरों का अहित न करे, बल्कि सदा प्रेम और सद्भावनाओं से भरा रहे, वही समाज का वास्तविक रत्न होता है। सेवा उसके लिए मात्र कार्य नहीं, बल्कि धर्म होता है। वह दूसरों में भी प्रभु का दर्शन करता है और जीवन को भक्ति की गहराई से जीता है। यही कारण है कि उसकी उपस्थिति में वैर मिट जाते हैं, क्लेश शान्त हो जाते हैं और केवल प्रेम का वातावरण रह जाता है। ऐसे निर्मल हृदय वाले दयालु और धर्मात्मा विरले ही होते हैं, और उनका मिलना जीवन का सबसे बड़ा वरदान होता है।
ऐसा चरित्र जो कभी दूसरों का अहित न करे, बल्कि सदा प्रेम और सद्भावनाओं से भरा रहे, वही समाज का वास्तविक रत्न होता है। सेवा उसके लिए मात्र कार्य नहीं, बल्कि धर्म होता है। वह दूसरों में भी प्रभु का दर्शन करता है और जीवन को भक्ति की गहराई से जीता है। यही कारण है कि उसकी उपस्थिति में वैर मिट जाते हैं, क्लेश शान्त हो जाते हैं और केवल प्रेम का वातावरण रह जाता है। ऐसे निर्मल हृदय वाले दयालु और धर्मात्मा विरले ही होते हैं, और उनका मिलना जीवन का सबसे बड़ा वरदान होता है।
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Admin - Saroj Jangir
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