अरी मैया कन्हैया की शिकायत क्या करूं

अरी मैया कन्हैया की शिकायत क्या करूं


अरी मैया, कन्हैया की शिकायत क्या करूं,
नटखट ने गगरिया फोड़ दी मेरी।
ये आकर पास चुपके से तेरे,
कान्हा तेरे छलिया ने मटकिया फोड़ दी मेरी।

अंधेरी रात में आकर मेरा माखन चुराता है,
मैं लड़ती हूं, अकड़ता है, मुझे आंखें दिखाता है।
चुनरिया खींचकर मेरी,
मारा हाथ घूंघट पट पे, नथुनिया तोड़ दी मेरी।
अरी मैया, कन्हैया की शिकायत क्या करूं।

फंसाकर मुझको बातों में, मुझे घर में बुलाता है,
अगर इनकार करूं, मैया, उलाहना लेकर आता है।
शिकायत लेकर आता है।
यह झूठी है जमाने की,
मिली थी कल मुझे पनघट पे, मुरलिया तोड़ दी मेरी।
अरी मैया, कन्हैया की शिकायत क्या करूं।

ये झगड़ा गोपियों का निराला है, अनोखा है,
बिहारी जी से मिलने का सुनहरा यही मौका है।
मैं बलिहारी, बलिहारी, कन्हैया को बिठा कर पल में,
गगरिया फोड़ दी मेरी।
अरी मैया, कन्हैया की शिकायत क्या करूं।


अरी मैया कन्हैया की शरारत क्या कहुँ नटखट की,श्री गोपाल नंदन जी महाराज

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"कन्हैया" शब्द का शाब्दिक अर्थ भगवान श्रीकृष्ण है, जो उनके बाल्यकाल के नाम के रूप में प्रसिद्ध है। दार्शनिक रूप से, "कन्हैया" प्रेम, भक्ति और आनंद का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएँ जीवन में प्रेम, करुणा और आध्यात्मिकता के महत्व को दर्शाती हैं। उनकी शिक्षाएँ आत्मा और परमात्मा के मिलन की ओर इंगित करती हैं, जो भक्ति मार्ग का सार है।
 
अरी मैया कन्हैया की शरारत क्या कहुँ नटखट की,श्री गोपाल नंदन जी महाराज
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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