पाठ खोल दे पुजारी थोड़ो जट पट को

पाठ खोल दे पुजारी थोड़ो जट पट को


पट खोल दे पुजारी थोड़ो जटपट को,
मोड़ो होयो रे माने दरसण को।

सांवरिया सेठ की महिमा है भारी,
दो नंबर की बात है सारी,
सोनो आयो रे चढ़ावो थारे भर भर को,
मोड़ो होयो रे माने दरसण को।

जल जुलनी को मेलो लागे,
दुनिया थारे दरसण आगे,
उड़े रंग गुलाल थारे मेले को,
मोड़ो होयो रे माने दरसण को।

अमावस्या ने गिणतियाँ भारी,
भंडारा की बात निराली,
कटे छापो, डालियो थारे सेठा को,
मोड़ो होयो रे माने दरसण को।

धरम तंवर चरणा को चाकर,
महिमा गावे भजन सुना कर,
मने राखो नी चरणा रो चाकर को,
मोड़ो होयो रे माने दरसण को।


sawariya seth ke bhajan new 2023 | Dharmendra Tanwar | पाठ खोल दे पुजारी सावलिया को

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पट खोलने की विनती में भक्त का सरल, सजीव और व्यंग्यपूर्ण भाव झलकता है—भक्त का पुजारी से विनयहै कि जल्दी से पट खोल दो, क्योंकि मन में दर्शन की तीव्र लालसा है। सांवरिया सेठ की महिमा का बखान करते हुए वह कहता है कि दुनिया की दिखावे वाली बातें दो नंबर की हैं, असली सुख तो सेठ के दरबार में है, जहाँ भक्त अपने पूरे मन से चढ़ावा लाता है। जल जुलनी के मेले में, रंग-गुलाल उड़ते हैं और सारी दुनिया दर्शन के लिए उमड़ती है। अमावस्या की गिनतियाँ, भंडारे की रौनक, और सेठ की छाप सब निराली हैं। भक्त प्रार्थना करता है कि उसे चरणों का चाकर बना लो, ताकि वह हमेशा भजन गाकर, महिमा गाकर, तुम्हारे चरणों में ही रह सके—बस जल्दी से पट खोल दो, ताकि मन की व्याकुलता शांत हो सके।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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