मै की की सिफ्ता दसा मनमोहन दे दरबार दिया
मै की की सिफ्ता दसा मनमोहन दे दरबार दिया
मैं की-की सिफ़ता दसां,
मनमोहन दे दरबार दियां।
तेरे दर दियां ठंडियां छांवां,
तप्दे सीने नूं ठार दियां,
मैं की-की सिफ़ता दसां...
गरुड़ सवारी सोहणी लगदी,
हाथ विच मुरली सोहणी सजदी,
सिफ़ता तारणहार दियां,
मैं की-की सिफ़ता दसां...
दर तेरे ते झूलदे झंडे,
सब नूं मिठियां मुरादां वंडदे,
संगतां अरज़ गुज़ार दियां,
मैं की-की सिफ़ता दसां...
साफ़ जीणां दियां हुंदियां नीतां,
श्याम दे नाल हुंदियां प्रीतां,
नईं खुशियां संसार दियां,
मैं की-की सिफ़ता दसां...
मनमोहन दे दरबार दियां।
तेरे दर दियां ठंडियां छांवां,
तप्दे सीने नूं ठार दियां,
मैं की-की सिफ़ता दसां...
गरुड़ सवारी सोहणी लगदी,
हाथ विच मुरली सोहणी सजदी,
सिफ़ता तारणहार दियां,
मैं की-की सिफ़ता दसां...
दर तेरे ते झूलदे झंडे,
सब नूं मिठियां मुरादां वंडदे,
संगतां अरज़ गुज़ार दियां,
मैं की-की सिफ़ता दसां...
साफ़ जीणां दियां हुंदियां नीतां,
श्याम दे नाल हुंदियां प्रीतां,
नईं खुशियां संसार दियां,
मैं की-की सिफ़ता दसां...
मैं की की सीफतां दसां मनमोहन दे दरबार दीयाँ
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Author - Saroj Jangir
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