महा समागम महाकुंभ है संगम तट से हर हर गंगे
महाकुंभ
महा समागम महाकुंभ है संगम तट से हर हर गंगे भजन
संगम तट से हर हर गंगे
डुबकी डुबकी हर हर गंगे,
दिव्य त्रिवेणी हर हर गंगे,
मोक्ष दायनी हर हर गंगे,
संगम तट से हर हर गंगे
डुबकी डुबकी हर हर गंगे।
हर हर हर हर गंगे,
हर हर हर हर गंगे।
यह जो महाकुंभ की धरती है,
त्रिवेणी यहां पर बनती है,
जन्म से लेकर मरण तलक,
गंगा मैया संग चलती है,
हर हर हर हर गंगे,
हर हर हर हर गंगे।
महा समागम महाकुंभ है,
रीत पुरातन महाकुंभ है,
विश्व सनातन महाकुंभ है,
दृश्य विहंगम महाकुंभ है।
शंखनाद डम डम डमरू,
प्रयागराज में गूंज रहा,
हर कोई अपने अंदर,
स्वयं सत्य को ढूंढ रहा।
पावन पुन्य त्रिवेणी जहां,
मां गंगा जमुना सरस्वती,
तन मन को निर्मल करती,
महाकुंभ की ये डुबकी।
महा समागम महाकुंभ है,
रीत पुरातन महाकुंभ है,
विश्व सनातन महाकुंभ है,
दृश्य विहंगम महाकुंभ है।
नमामि गंगे नमामि गंगे।
यहां जाति धर्म का भेद नहीं,
भक्त भतेरे आते हैं,
संगम की अमृत धारा,
लुटिया भर कर ले जाते हैं।
सुनते हैं यहां पर देवता भी,
भेष बदल के आते हैं,
दिव्य अलौकिक शक्ति से,
सबके मन को हर्षाते हैं।
महा समागम महाकुंभ है,
रीत पुरातन महाकुंभ है,
विश्व सनातन महाकुंभ है,
दृश्य विहंगम महाकुंभ है।
हर हर गंगे हर हर गंगे।
डुबकी डुबकी हर हर गंगे,
दिव्य त्रिवेणी हर हर गंगे,
मोक्ष दायनी हर हर गंगे,
संगम तट से हर हर गंगे
डुबकी डुबकी हर हर गंगे।
हर हर हर हर गंगे,
हर हर हर हर गंगे।
यह जो महाकुंभ की धरती है,
त्रिवेणी यहां पर बनती है,
जन्म से लेकर मरण तलक,
गंगा मैया संग चलती है,
हर हर हर हर गंगे,
हर हर हर हर गंगे।
महा समागम महाकुंभ है,
रीत पुरातन महाकुंभ है,
विश्व सनातन महाकुंभ है,
दृश्य विहंगम महाकुंभ है।
शंखनाद डम डम डमरू,
प्रयागराज में गूंज रहा,
हर कोई अपने अंदर,
स्वयं सत्य को ढूंढ रहा।
पावन पुन्य त्रिवेणी जहां,
मां गंगा जमुना सरस्वती,
तन मन को निर्मल करती,
महाकुंभ की ये डुबकी।
महा समागम महाकुंभ है,
रीत पुरातन महाकुंभ है,
विश्व सनातन महाकुंभ है,
दृश्य विहंगम महाकुंभ है।
नमामि गंगे नमामि गंगे।
यहां जाति धर्म का भेद नहीं,
भक्त भतेरे आते हैं,
संगम की अमृत धारा,
लुटिया भर कर ले जाते हैं।
सुनते हैं यहां पर देवता भी,
भेष बदल के आते हैं,
दिव्य अलौकिक शक्ति से,
सबके मन को हर्षाते हैं।
महा समागम महाकुंभ है,
रीत पुरातन महाकुंभ है,
विश्व सनातन महाकुंभ है,
दृश्य विहंगम महाकुंभ है।
हर हर गंगे हर हर गंगे।
महाकुंभ के पावन अवसर पर त्रिवेणी संगम में स्नान का बहुत महत्व है। यह स्थान गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम स्थल है। इसे मोक्षदायिनी माना गया है। इस संगम में स्नान करने से हमारे समस्त पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है। महाकुंभ के दौरान देवता स्वयं त्रिवेणी संगम में निवास करते हैं। जिससे इस स्नान का पुण्य अनंत गुना बढ़ जाता है। हम आस्था और भक्ति से यहां स्नान कर ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपने जीवन को पवित्र व कृतार्थ बनाते हैं। हर हर गंगे।
त्रिवेणी महाकुंभ | Triveni Mahakumbh | Divya Kumar | हर हर गंगे | Prayagraj Mahakumbh 2025
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"हर हर गंगे" की गूंज के साथ, प्रस्तुत है "त्रिवेणी महाकुंभ", एक भव्य और दिव्य भजन जो माँ गंगा की महिमा का गुणगान करता है। इस गीत को अपनी सशक्त आवाज़ से सजाया है दिव्य कुमार ने, जबकि संगीतकार विक्की प्रसाद ने इसे भक्तिमय धुनों से संवारा है। गीतकार संजय मिश्रा के लिखे भावपूर्ण शब्द माँ गंगा के पावन स्वरूप और उनकी अलौकिक महिमा को दर्शाते हैं।
Song Name: Triveni Mahakumbh
Artist: Divya Kumar
Music Director: Vickey Prasad
Lyrics: Sanjay Dhoopa Mishra
Artist: Divya Kumar
Music Director: Vickey Prasad
Lyrics: Sanjay Dhoopa Mishra
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Author - Saroj Jangir
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