गोवर्धन धारा गिरधर ने गोकुल गांव बचाया
गोवर्धन धारा गिरधर ने गोकुल गांव बचाया
गोवर्धन धारा गिरधर ने,
गोकुल गांव बचाया।
जब इन्द्र देव की एक न चली,
शिव चरणों में धाया॥
शिव मुस्काए, ध्यान लगाए,
इन्द्र यहां क्यों आया?
बैर लिया है स्वयं हरि से,
अब पछतावन आया॥
हो मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
जब-जब होती धर्म की हानि,
हरि लेते अवतार।
जुग-जुग की यह अमर कथा है,
जाने सब संसार॥
जब-जब होती धर्म की हानि,
हरि लेते अवतार।
जाने सब संसार॥
हो मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
द्वापर देव दुलारे कृष्णा,
कंस काल में आये।
त्राहिमाम थी प्रजा ब्रज की,
कृष्ण ने कष्ट मिटाए॥
द्वापर देव दुलारे कृष्णा,
कंस काल में आये।
त्राहिमाम थी प्रजा ब्रज की,
कृष्ण ने कष्ट मिटाए॥
हो मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
श्रीकृष्ण गोविंद मुरारी,
जप ले भज ले प्यारे।
नाथ नारायण वासुदेव,
जग से तारणहारे॥
श्रीकृष्ण गोविंद मुरारी,
जप ले भज ले प्यारे।
नाथ नारायण वासुदेव,
जग से तारणहारे॥
हो मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
हो मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
गोकुल गांव बचाया।
जब इन्द्र देव की एक न चली,
शिव चरणों में धाया॥
शिव मुस्काए, ध्यान लगाए,
इन्द्र यहां क्यों आया?
बैर लिया है स्वयं हरि से,
अब पछतावन आया॥
हो मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
जब-जब होती धर्म की हानि,
हरि लेते अवतार।
जुग-जुग की यह अमर कथा है,
जाने सब संसार॥
जब-जब होती धर्म की हानि,
हरि लेते अवतार।
जाने सब संसार॥
हो मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
द्वापर देव दुलारे कृष्णा,
कंस काल में आये।
त्राहिमाम थी प्रजा ब्रज की,
कृष्ण ने कष्ट मिटाए॥
द्वापर देव दुलारे कृष्णा,
कंस काल में आये।
त्राहिमाम थी प्रजा ब्रज की,
कृष्ण ने कष्ट मिटाए॥
हो मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
श्रीकृष्ण गोविंद मुरारी,
जप ले भज ले प्यारे।
नाथ नारायण वासुदेव,
जग से तारणहारे॥
श्रीकृष्ण गोविंद मुरारी,
जप ले भज ले प्यारे।
नाथ नारायण वासुदेव,
जग से तारणहारे॥
हो मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
हो मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर गिरधारी।
मेरा राधे कुंज बिहारी,
नटवर नागर लीलाधारी॥
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गोवर्धन पर्वत उठाने की लीला में कृष्ण की करुणा, शक्ति और दिव्यता का अद्भुत संगम है। जब इंद्रदेव के क्रोध से गोकुल पर घनघोर वर्षा होने लगी, तब कृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और समस्त गोकुलवासियों को उसकी छाया में सुरक्षित कर लिया। यह दृश्य केवल शक्ति का नहीं, अपितु अपने भक्तों के प्रति प्रेम, रक्षा और दया का भी प्रमाण है।
इंद्र के अहंकार का जब कोई उपाय न चला, तो वे शिव के चरणों में पहुँचे। शिव मुस्कुराए और ध्यानमग्न होकर बोले—अब पछताने का समय है, क्योंकि बैर स्वयं हरि से लिया गया है। कृष्ण की यह लीला बताती है कि जब भी धर्म पर संकट आता है, जब भी अन्याय बढ़ता है, तब-तब हरि अवतार लेते हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। यह कथा युग-युगांतर से अमर है और समस्त संसार इसे जानता है।
Singer : Vastvik Roy
Composer : Shoma Banerjee
Lyrics : Maneesh kaushik
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तू है थानेदार सांवरे करले गिरफ्तार
चाँदी का पालना लायो मारा सेठ जी भजन
बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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