माँ ऊँचे पहाड़ों से नीचे उतर आओ भजन
माँ ऊँचे पहाड़ों से नीचे उतर आओ भजन
माँ ऊँचे पहाड़ों से नीचे उतर आओ माँ,
कभी मंदिर से अपने घर मेरे आओ माँ।।
मैं कई बार मैया तेरे द्वार घूम आई,
मैं नंगे पाँव आकर तेरे पाँव चूम आई,
अब मुझ पर भी अपनी ममता बरसाओ माँ।।
कभी मंदिर से अपने घर मेरे आओ माँ।।
नित दहियौं में मैया गुण गाऊँ मैं अंबे,
बिन तेरे कभी देवी, मैं रही न जगदंबे माँ,
अब और मुझे माता तुम न तरसाओ माँ।।
कभी मंदिर से अपने घर मेरे आओ माँ।।
मैंने बचपन से तेरे उपवास रखा है माँ,
तेरी मूरत को दिल में मैंने पास रखा है माँ,
अपनी पुजारन को दर्शन दिखलाओ माँ।।
कभी मंदिर से अपने घर मेरे आओ माँ।।
कभी मंदिर से अपने घर मेरे आओ माँ।।
मैं कई बार मैया तेरे द्वार घूम आई,
मैं नंगे पाँव आकर तेरे पाँव चूम आई,
अब मुझ पर भी अपनी ममता बरसाओ माँ।।
कभी मंदिर से अपने घर मेरे आओ माँ।।
नित दहियौं में मैया गुण गाऊँ मैं अंबे,
बिन तेरे कभी देवी, मैं रही न जगदंबे माँ,
अब और मुझे माता तुम न तरसाओ माँ।।
कभी मंदिर से अपने घर मेरे आओ माँ।।
मैंने बचपन से तेरे उपवास रखा है माँ,
तेरी मूरत को दिल में मैंने पास रखा है माँ,
अपनी पुजारन को दर्शन दिखलाओ माँ।।
कभी मंदिर से अपने घर मेरे आओ माँ।।
Unche Pahado Se Niche Utar Aao Ma || Sanjo Baghel || Super Hit Navratra Bhajan # Ambey Bhakti
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➤Album :- Bhar De Aanchal Mera Sherawali Vishesh Aalah Maa Ki Mahima
➤Song :- Unche Pahado Se Niche
➤Singer :- Sanjo Baghel
➤Music :- Parshuram Patel
➤Writer :- Sarwan Kumar Yadav
➤ Label :- Vianet Media
➤ Sub Label :- Ambey
➤Song :- Unche Pahado Se Niche
➤Singer :- Sanjo Baghel
➤Music :- Parshuram Patel
➤Writer :- Sarwan Kumar Yadav
➤ Label :- Vianet Media
➤ Sub Label :- Ambey
भक्त ऊँचे पहाड़ों और मंदिरों से उतरकर अपने साधारण घर में आने की विनती करता है, बचपन से उपवास, नंगे पैर द्वार घूमना और गुणगान करने वाली पुजारिन की ममता की व्यथा व्यक्त करता है। यह उस गहन मातृभक्ति को उजागर करता है, जो जगदंबे को हृदय में बसा लिए बिना रह न सके, और अब तरसते हुए दर्शन की आकांक्षा रखती है। भक्त की निष्ठा—दहियाँ गाना, पाँव चूमना और मूर्ति को पास रखना—माँ की करुणा को घर-घर तक लाने का भाव जगाती है। यह भक्ति का सरलतम रूप है, जहाँ मंदिर की औपचारिकता से ऊपर उठकर ममता का व्यक्तिगत बरसना ही जीवन का सार बन जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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