राम नाम का दीप जला ले मन के अँधियारे भजन
राम नाम का दीप जला ले मन के अँधियारे को भजन
राम नाम का दीप जला ले,
मन के अँधियारे को मिटा ले।
कहते हैं संत कबीर सुनो रे,
प्रेम से प्रभु को पा ले।।
झूठी माया झूठा मेला,
साथ न जाए धन का थैला।
राम नाम की पूँजी जोड़ ले,
यही है जीवन का अलबेला।।
राम नाम का दीप जला ले,
मन के अँधियारे को मिटा ले।
कहते हैं संत कबीर सुनो रे,
प्रेम से प्रभु को पा ले।।
माटी का तन माटी होगा,
जो आया है सो जाएगा।
राम नाम की नाव में बैठ,
भवसागर से तर जाएगा।।
राम नाम का दीप जला ले,
मन के अँधियारे को मिटा ले।
कहते हैं संत कबीर सुनो रे,
प्रेम से प्रभु को पा ले।।
मंदिर मस्जिद ढूँढे जग सारा,
साहिब बैठा तेरे द्वारा।
मन के भीतर झाँक के देख,
वहीं मिलेगा तेरा प्यारा।।
राम नाम का दीप जला ले,
मन के अँधियारे को मिटा ले।
कहते हैं संत कबीर सुनो रे,
प्रेम से प्रभु को पा ले।।
ऊँचे महल अटारी वाले,
रह जाएँगे यहीं निराले।
साथ चलेगा कर्म तुम्हारा,
बाकी सब हैं खेल हवाले।।
राम नाम का दीप जला ले,
मन के अँधियारे को मिटा ले।
कहते हैं संत कबीर सुनो रे,
प्रेम से प्रभु को पा ले।।
मन के अँधियारे को मिटा ले।
कहते हैं संत कबीर सुनो रे,
प्रेम से प्रभु को पा ले।।
झूठी माया झूठा मेला,
साथ न जाए धन का थैला।
राम नाम की पूँजी जोड़ ले,
यही है जीवन का अलबेला।।
राम नाम का दीप जला ले,
मन के अँधियारे को मिटा ले।
कहते हैं संत कबीर सुनो रे,
प्रेम से प्रभु को पा ले।।
माटी का तन माटी होगा,
जो आया है सो जाएगा।
राम नाम की नाव में बैठ,
भवसागर से तर जाएगा।।
राम नाम का दीप जला ले,
मन के अँधियारे को मिटा ले।
कहते हैं संत कबीर सुनो रे,
प्रेम से प्रभु को पा ले।।
मंदिर मस्जिद ढूँढे जग सारा,
साहिब बैठा तेरे द्वारा।
मन के भीतर झाँक के देख,
वहीं मिलेगा तेरा प्यारा।।
राम नाम का दीप जला ले,
मन के अँधियारे को मिटा ले।
कहते हैं संत कबीर सुनो रे,
प्रेम से प्रभु को पा ले।।
ऊँचे महल अटारी वाले,
रह जाएँगे यहीं निराले।
साथ चलेगा कर्म तुम्हारा,
बाकी सब हैं खेल हवाले।।
राम नाम का दीप जला ले,
मन के अँधियारे को मिटा ले।
कहते हैं संत कबीर सुनो रे,
प्रेम से प्रभु को पा ले।।
Ram Naam Ka Deep Jala Le Bhajan Latest Bhajan
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बाहरी माया‑मेला और धन का मोह सबगर्भित और मिथ्या है, अस्थायी संपत्ति साथ नहीं जाती, इसलिए राम नाम की पूँजी इकट्ठी करो—यह जीवन का असली अनमोल धन है जो भवसागर को पार कराता है। शरीर मिट्टी का है और वह फिर मिट्टी में लौटेगा; जीवन की नश्वरता समझकर राम की नाव में बैठो और आत्मा का उद्धार सुनिश्चित करो। मंदिर-मस्जिद की बहस छोड़कर भीतर झाँकने का पाठ है—परमात्मा तो तेरे भीतर ही विराजमान है—इसलिए दिखावे के ऊँचे महल और अटारियाँ अंततः न होश रखेंगी; साथ केवल तुम्हारे कर्म चलेंगे, बाकी सब क्षणिक खेल हैं।
Lyrics : Saroj Jangir (Lyricspandits)
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Author - Saroj Jangir
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