मोर गुरु बाबा उही जाने महिमा ल तोर भजन

मोर गुरु बाबा उही जाने महिमा ल तोर भजन

उही जाने महिमा ल तोर सतगुरु बाबा ॥
जेहा मन से भजन करेय हो ॥
मोर गुरु बाबा.. उही जाने महिमा तोर ॥

पूजा तोरे भक्ति मोरे भक्ति म भगवान,
गरीब ह अमीर बनगे पाके तोर नाव ॥
तो उही जाने महिमा ल तोर
सूबा शाम सुमिरन कर जोर ॥
मोर गुरु बाबा.. उही जाने महिमा ल तोर

तोर नाम के बदना कोनो रइथे जी उपास,
मनके मनौती पूरा पाके शरधा अउ बिश्वास ॥
तो उही जाने महिमा ल तोर
जे सतनाम साधे सुरती के डोर ॥
मोर गुरु बाबा.. उही जाने महिमा ल तोर

तोर चरन म कतको आथे लाखो अउ हजार,
कतको भुइया नापत गुरु, खाड़े तोर दुवार ॥
तो उही जाने महिमा ल तोर
जेकर हिर्दय उठे भाव बिहोर ॥
मोर गुरु बाबा.. उही जाने महिमा ल तोर



उहि जाने महिमा ल तोर II Uhi Jane Mahima la Tor II स्वर - वीरेंद्र चतुर्वेदी & कुसुम प्रजापति II

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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