मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे अपनी तो पतंग उड़ गई रे

मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे अपनी तो पतंग उड़ गई रे

फासले मिटा दो आज सारे,
हो गए जी आप तो हमारे,
मन का पंछी डोल रहा,
संग मेरे बोल रहा,
मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,
अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।

जब से तेरा दर्श मिला,
मन ये मेरा खिला खिला,
और मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,
अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।
उड़ गई, उड़ गई, उड़ गई,
अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।

तुम हो जान, तुम हो ज़िंदगानी,
क्या है तेरे बिन मेरी कहानी,
मैंने तुझे जान लिया,
अपना तुझे मान लिया,
मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,
अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।
जब से तेरा दर्श मिला...।।

चरणों का बनकर पुजारी,
बीते उमरिया ये सारी,
नाम तेरा जब से लिया,
जाम तेरा जब से पिया,
मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,
अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।
जब से तेरा दर्श मिला...।।

आंखों में हो तेरा ही नज़ारा,
चारों तरफ दिखे श्याम प्यारा,
मधुर मधुर गान सुनूं,
मुरली की तान सुनूं,
क्योंकि मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,
अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।
जब से तेरा दर्श मिला...।।

फासले मिटा दो आज सारे,
हो गए जी आप तो हमारे,
मन का पंछी डोल रहा,
संग मेरे बोल रहा,
मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,
अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।
जब से तेरा दर्श मिला,
मन ये मेरा खिला खिला,
और मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,
अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।
उड़ गई, उड़ गई, उड़ गई,
अपनी तो पतंग उड़ गई रे...।।


अपनी तो पतंग उड़ गयी रे !! बाबा श्री चित्र विचित्र जी महाराज !! 31.12.2017 !! वृन्दावन !!

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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