मैं बरसाने की छोरी ना कर मोते बरजोरी

मैं बरसाने की छोरी ना कर मोते बरजोरी

मैं बरसाने की छोरी, ना कर मोसे बरजोरी,
तू कारो और मैं गोरी, अपनों मेल नहीं।
मैं तोसे बांधूं प्रीत की डोरी, करता फेल नहीं।।

शुक्र कारो की पड़े नहीं, यशोदा मैया के डंडे,
एक डांट में ही जाते, अरमान तुम्हारे ठंडे।
मैं नंद बाबा का लाला, मैं तो ना डरने वाला,
तेरा पड़ा है मोसे पाला, करता खेल नहीं।
मैं गुजरी, तू गवाला, अपनों मेल नहीं।।
मैं बरसाने की छोरी...।।

जहां-जहां मैं जाती हूं, क्यों पीछे-पीछे आए,
तेरो मेरो मेल नहीं, यह कौन तुम्हे समझाए।
तू मुझको ना पहचानी, पिया घाट-घाट का पानी,
मैं दरिया हूं तूफानी, करता खेल नहीं।
अरे ना कर मोसे छैतानी, अपनों मेल नहीं।।
मैं बरसाने की छोरी...।।

ऐसी वैसी नार नहीं, क्यों मोपे डोरे डाले,
बीच डगर में छोड़ सताना, ओ गोकुल के ग्वाले।
मेरा रोज का आना-जाना, नरसी का माखन खाना,
‘शर्मा’ है श्याम दीवाना, करता खेल नहीं।
अरे तू गोकुल, मैं बरसाना, अपनों मेल नहीं।।
मैं बरसाने की छोरी...।।


Main Barsane Ki Chori मैं बरसाने की छोरी न कर मोसे बरजोरी तू कारो में गोरी अपना मेल नहीं

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मैं बरसाने की छोरी न कर मोसे बरजोरी तू कारो में गोरी अपना मेल नहीं
Boy Hemant Kushwah

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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