दूजे दिन नहीं करि सके तीजे दिन करू दी मीनिंग
दूजे दिन नहीं करि सके तीजे दिन करू दी मीनिंग
दूजे दिन नहीं करि सके, तीजे दिन करू जाय |
कबीर साधु दरश ते, मोक्ष मुक्ति फन पाय ||
कबीर साधु दरश ते, मोक्ष मुक्ति फन पाय ||
Duje Din Nahi Kari Sake, Teeje Din Karu Jay,
Kabir Sadhu Darash Te, Moksh Mukti Phan Pay.
कबीर साहेब का कथन है की यदि हर दूसरे दिन संतजन/साधुओं का दर्शन कर पाना संभव नहीं हो पाता है तो साधक को चाहिए की वह तीसरे दिन अवश्य ही पुण्यात्मा के दर्शन को जाए और मोक्ष रूपी मुक्ति फल को प्राप्त करें। साधु के दर्शन के अभाव में मोक्ष रूपी फल की प्राप्ति नहीं हो सकती है। यदि हम दूसरे दिन संतों के दर्शन करने में सक्षम नहीं हैं, तो हमें तीसरे दिन भी जरूर करना चाहिए। संतों के दर्शन से जीव मोक्ष और मुक्ति के महान फल को प्राप्त करता है।
कबीर साहेब गुरु के दर्शन के प्रति सन्देश देते हैं की यदि तुम दूजे दिन संतजन के दर्शन नहीं कर सको तो हर तीसरे दिन करो। साधू के दर्शन से ही मोक्ष और मुक्ति प्राप्त होती है। आशय है की गुरु के सानिध्य से ही मुक्ति फल प्राप्त होता है। इसके लिए हमें चाहिए की हम नित्य ही गुरु के दर्शन करें। इस दोहे में भी संत कबीर दास जी ने साधु के दर्शन के महत्व को बताया है। वे कहते हैं कि यदि किसी भक्त को साधु के दर्शन दूसरे दिन करने का समय न मिले, तो वह तीसरे दिन भी करे। क्योंकि साधु के दर्शन से जीव मोक्ष और मुक्ति प्राप्त कर सकता है।
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Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं कबीर के दोहों को अर्थ सहित, कबीर भजन, आदि को सांझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें। |
