जहाँ तक नज़र है वहाँ तुम ही तुम हो भजन

जहाँ तक नज़र है वहाँ तुम ही तुम हो भजन

जहाँ तक नज़र है, वहाँ तुम ही तुम हो,
कि पहले भी तुम थे, कि तुम बाद में ही,
यहाँ तक उम्र है, वहाँ तुम ही तुम हो।

धरती में, अम्बर में, नदियों में, सागर में,
सूरज की गर्मी में, कलियों की नरमी में,
तारों की बस्ती में, लहरों की मस्ती में,
मौसम की धड़कन में, लम्हों की थिरकन में,
जहाँ तक असर है, वहाँ तुम ही तुम हो।।

जहाँ तक नज़र है, वहाँ तुम ही तुम हो,
जहाँ तक डगर है, वहाँ तुम ही तुम हो,
रिश्तों में, नातों में, सपनों की रातों में,
आशा-निराशा में, दिल की दिलाशा में,
भावों के बंधन में, खुशियों के आँगन में,
जीवन के वर्षों में, अटके संघर्षों में,
जहाँ तक असर है, वहाँ तुम ही तुम हो।।



Jahan Tak Nazar Hai - Geetanjali Rai | Audio | Bhajan | Sanskar Bhajan

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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