माखी गुड में गडी रहे पंख रहे लिपटाए हिंदी मीनिंग

माखी गुड में गडी रहे पंख रहे लिपटाए हिंदी मीनिंग Makhi Gud Me Gadi Rahe Meaning : Kabir Ke Dohe Hindi arth/Bhavarth Sahit

माखी गुड में गडी रहे, पंख रहे लिपटाए ।
हाथ मेल और सर धुनें, लालच बुरी बलाय ।
 
Makhi Gud Me Gadi Rahe,  Pankh Rahe Liptay,
Hath Mel Aur Sar Dhune, Lalach Buri Balay.
 
माखी गुड में गडी रहे पंख रहे लिपटाए हिंदी मीनिंग Makhi Gud Me Gadi Rahe Meaning : Kabir Ke Dohe Hindi arth/Bhavarth Sahit
 

कबीर के दोहे का हिंदी मीनिंग (अर्थ/भावार्थ) Kabir Doha (Couplet) Meaning in Hindi

जीवात्मा सांसारिक लोभ और विषय विकार में रत रहती है। वह हाथ पैर को धुनती रहती है और लालच में फंसकर गुड़ की चासनी में लिपट कर मर जाती है। आशय है की व्यक्ति संसार में आकर लोभ और विषय विकार में फंस जाती है और अपने जीवन के उद्देश्य को विस्मृत कर बैठता है। इस दोहे में कबीर दास जी ने लालच के बुरे प्रभावों का वर्णन किया है। वे कहते हैं कि लालच एक ऐसी बीमारी है जो मनुष्य को अंधा बना देती है। लालची व्यक्ति केवल धन और संपत्ति के पीछे भागता है। वह सांसारिक सुखों में लिपट जाता है। जब वह इन सुखों से दूर जाने का प्रयास करता है तो वह असमर्थ हो जाता है। 

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं कबीर के दोहों को अर्थ सहित, कबीर भजन, आदि को सांझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें

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