जेहड़ा राधे-राधे गावे ओहदी लगे हाजरी

जेहड़ा राधे-राधे गावे ओहदी लगे हाजरी


जेहड़ा राधे-राधे गावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा श्याम-श्याम गावे, ओहदी लगे हाजरी।
ओहदी लगे हाजरी, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा राधे-राधे गावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा ताड़ियां बजावे, ओहदी लगे हाजरी।

वृंदावन जान्दी आं मैं, दर्शन पाउँदी आं।
दर्शन पा के मैं तां, धन हो जान्दी आं।
जेहड़ा वृंदावन जावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा दौड़-दौड़ जावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा राधे-राधे गावे, ओहदी लगे हाजरी।

जंगल विच जान्दी आं मैं, चंदन लियाउंदी आं।
आपणे श्याम नूं मैं, तिलक लगाउंदी आं।
जेहड़ा तिलक लगावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा दर्शन पावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा राधे-राधे गावे, ओहदी लगे हाजरी।

कृष्ण कन्हैया मेरा, सोहणा लगदा।
सारी दुनियां तों, मनमोहणा लगदा।
जेहड़ा कथा विच आवे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा सीस नूं झुकावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा राधे-राधे गावे, ओहदी लगे हाजरी।

घर विच आपणे गऊआं रखियां।
गऊआं नूं रख के, दूध मैं चोंदी आं।
जेहड़ा गऊआं नूं पाले, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा गऊ पूजा करावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा राधे-राधे गावे, ओहदी लगे हाजरी।

वृंदावन जान्दी आं मैं, माखन लिजांदी आं।
दूध रिड़क के मैं, माखन लिजांदी आं।
जेहड़ा माखन खिलावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा मिश्री भोग लगावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा राधे-राधे गावे, ओहदी लगे हाजरी।

आपणे श्याम लिए, बंसी मैं लियाई।
मेरे श्याम ने, बंसी बजाई।
जेहड़ा बंसी लियावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा नच-नच गावे, ओहदी लगे हाजरी।
जेहड़ा राधे-राधे गावे, ओहदी लगे हाजरी।


जेडा राधे राधे गावे ओदी लगे हाजरी एक नया भजन डडयाली ठाकुर द्वारा पंजाब में

ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
 

पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।


जो भी व्यक्ति सच्चे मन से राधा-राधा या श्याम-श्याम का नाम लेता है, उसकी उपस्थिति स्वयं प्रभु के दरबार में दर्ज हो जाती है। नाम-स्मरण, ताली बजाना, वृंदावन की यात्रा करना, दौड़कर प्रभु के दर्शन के लिए जाना, चंदन और तिलक चढ़ाना, कथा में सम्मिलित होना, सिर झुकाना, गायों की सेवा करना, माखन और मिश्री का भोग लगाना, बंसी लाना और नृत्य-गान करना—इन सभी कार्यों को प्रभु की भक्ति के रूप में स्वीकार किया गया है।

वृंदावन की यात्रा और वहाँ के दर्शन को जीवन का परम सौभाग्य माना गया है। वहाँ जाकर प्रभु के दर्शन करने से जीवन धन्य हो जाता है। गायों की सेवा और पूजा को भी अत्यंत पुण्य का कार्य बताया गया है, क्योंकि यह कृष्ण की प्रिय सेवा है। माखन और मिश्री का भोग लगाना, बंसी लाना, तिलक चढ़ाना—ये सभी क्रियाएँ कृष्ण के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक हैं।

यह भजन भी देखिये
तू है थानेदार सांवरे करले गिरफ्तार
चाँदी का पालना लायो मारा सेठ जी भजन
बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

इस ब्लॉग पर आप पायेंगे मधुर और सुन्दर भजनों का संग्रह । इस ब्लॉग का उद्देश्य आपको सुन्दर भजनों के बोल उपलब्ध करवाना है। आप इस ब्लॉग पर अपने पसंद के गायक और भजन केटेगरी के भजन खोज सकते हैं....अधिक पढ़ें

Next Post Previous Post