आज के ही दिन आया नंदलाला, पड़ा गोकुल की ग्वालन से पाला, ऊंची डोरी पे बांधी मटकी, लपक झपक आये बृज ग्वाला।
माखन चोर की लीला देखो, कैसी रे निराली, बाल गोपाल की हथेलियां, वहीं जाकर देखेंगे।
नंद के घर आज आनंद है, देवकी मन परमानंद है, हरि का स्वरूप बाल रूप है, अष्टमी की गोकुल में धूम है, जा के गोवर्धन पूजेंगे, मानसी गंगा नहाएंगे।
द्वापर में आए बाल रूप धरकर, पाप का विनाश किया, पापी मारे चक्रधर धर्म का, प्रचार किया, देखेंगे लीला बाल कृष्ण की, भवसागर से तर जायेंगें।
श्रीकृष्ण के पावन धाम बृज गोकुल जाने का निमंत्रण है। जहां जन्माष्टमी का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इसमें नटखट बाल गोपाल की लीलाओं का वर्णन किया गया है। माखन चोरी, ऊंची डोरी से मटकी फोड़ने और ग्वालों संग खेल करने की झलक मिलती है। श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप और उनके अवतार के उद्देश्य को बताता है। उन्होंने अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना की। हम गोवर्धन पूजन करेंगे मानसी गंगा में स्नान करेंगे और बाल कृष्ण की अद्भुत लीलाओं का स्मरण कर भवसागर से पार होने का मार्ग पायेंगे। जय श्री कृष्ण।
नंद के घर आज आनंद है देवकी मन परमानंद है, हरि का स्वरूप बाल रूप है अष्टमी की गोकुल में धूम है जा के गोवर्धन पूजेंगे मानसी गंगा नहाएंगे द्वापर में आए बाल रूप धरकर पाप का विनाश किया पापी मारे चक्रधर धर्म का प्रचार किया देखेंगे लीला बाल कृष्ण की भवसागर से तर जाएंगे