करो चाहे लाख चतुराई उसी घर सबको जाना है

करो चाहे लाख चतुराई उसी घर सबको जाना है

करो चाहे लाख चतुराई, उसी घर सबको जाना है...।
बना एक कांच का मंदिर, उसी में भगवान रहते हैं,
लिए हैं पेन और कागज़, सभी की तक़दीर लिखते हैं,
करो चाहे लाख चतुराई, उसी घर सबको जाना है...।।

लड़कपन खेल में खोया, जवानी नींद भर सोया,
बुढ़ापा देखकर रोया, उसी घर सबको जाना है,
करो चाहे लाख चतुराई, उसी घर सबको जाना है...।।

वो टूटी आम से डाली, रोया बाग़ का माली,
बग़ीचा हो गया खाली, उसी घर सबको जाना है,
करो चाहे लाख चतुराई, उसी घर सबको जाना है...।।

पलंग के चार हैं पाए, विधाता लेने को आए,
खुशी से ले चलो भाई, रोएंगे बहन और भाई,
करो चाहे लाख चतुराई, उसी घर सबको जाना है...।।


एक दम सही बात है भजन में ......दिल छू लेगा ये चेतावनी भजन ||

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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