कुरिया हिंदी मीनिंग अर्थ मतलब
दूध गर्म करने के लिए उसे एक विशेष चूल्हे पर रखा जाता है जिसमे छाणे (उपले) और खीरों (कोयला) से सतत (निरंतर) ताप बना रहता था, उसे कुरिया
कहा जाता है। कुरिया गोल आकर का होता है। यह इतना बड़ा होता है जिसमें
कढावणी को इसके अंदर रखा सकता है। कुरिया को ऊपर से ढकने के लिए घड़े के ऊपर
के हिस्से का आधा हिस्सा काट कर उसका ढक्क्न बना लिया जाता है। इस पुरे
चूल्हे को गाय के गोबर से लेपा जाता है। अतः स्पष्ट है की एक विशेष प्रकार
के चूल्हे को कुरिया कहा जाता है जिसमें दूध धीरे धीरे गर्म होता है और उसे
बिल्ली से बचाने, अन्य अशुद्धियों से बचाने के लिए उस पर ढ़क्कन भी होता
है। कुरिया को आंचलिक स्तर पर "होरा" भी कहा जाता है।
विशेष
है की कुरिया में दूध गर्म करने से कई लाभ होते हैं। कुरिया में दूध गर्म
करने के दौरान वह ढका हुआ रहता है और केवल धुआँ निकलने की जगह खुली होती है
जिससे उसमे कोई कचरा नहीं गिरता है। ऊपर के छोटे से धुएं के निकास को बंद
कर देने पर बारिश का पानी या कोई कचरा उसमे नहीं गिरता था क्योंकि कुरिया
को अक्सर रसोई के बाहर, चौक के स्थापित किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसके
ऊपर चिकनी मिट्टी (खनेड़ा की मिट्टी जिससे घड़े और अन्य मिटटी के बर्तन बनाये
जाते हैं ) का लेप करने के उपरान्त गाय के गोबर का लेप किया जाता है, इससे
कुरिया एक बार गर्म होने के बाद काफी समय तक गर्म बना रहता है। इस सतत ताप
से दूध एक विशेष प्रकार से गर्म होता है जो बर्तन के तले पर नहीं लगता है
और नाहीं उफनता है।
इसमें
सीधे आंच के स्थान पर उपलों के अंगारों का उपयोग होता है। कुरिये का एक
अन्य लाभ यह भी होता है की जब महिलाएं अन्य काम काज में व्यस्त होती हैं तो
दूध धीरे धीरे गर्म होता रहता है और बिल्ली, चिड़िया, कौवा आदि पक्षियों से
यह सुरक्षित रहता है।
जिस मिट्टी के घड़े में दूध को कुरिया में गर्म होने के लिए रखा जाता है उसे "कढावणी"
कहा जाता है। कढावणी में केवल दूध को गर्म किया जाता है, दूध को इसके बाद
अन्य बर्तन में डाल दिया जाता है। यथा दूध को जमाने (दही ज़माना) के लिए जावणी
में रखा जाता है। दही को जावणी में जमाने के उपरान्त इसे बिलौने (मथना) के
लिए जिस हांडी का उपयोग किया जाता है उसे "बिलोवणी/बिलौनी" कहा जाता है।
यह सभी पात्र एक विशेष काम के लिए ही उपयोग में लिए जाते हैं और अदल बदल
नहीं किये जाते हैं। बिलोवना करने के लिए पारम्परिक रूप से झेरणा का उपयोग
किया जाता है।
जिस रस्सी से झेरणा को घुमाया जाता है उसे नेतरा कहा जाता है। झेरणा एक लकड़ी का मधाणीनुमा यंत्र होता है। इसके उपरान्त घी और छाछ पृथक हो जाते हैं। प्राप्त कच्चे घी को "चूंटिया"
घी कहा जाता है। छाछ को बिलोवणी में रखा जाता है जिससे वह पुरे दिन ठंडी
बनी रहती है और खट्टी नहीं होती है। छाछ को लेने के लिए नारियल के कठोर
हिस्से को आधा काट कर एक कटोरा (बाउल) बना लिया जाता है जिसे "टोकसी" कहा जाता है।
कुरिया शब्द के विषय में विस्तार से जानकारी
संज्ञा (Noun)
कुरिया
शब्द राजस्थानी भाषा का शब्द है जिसे आंचलिक स्तर पर कई प्रकार से बोला
जाता है, यथा, कुर्या, कुरिया Kuriya, Kurya, होरा (Houra) आदि।
कुरिया शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun ) है। ऐसे शब्द जिनसे किसी विशेष स्थान, विशेष वस्तु और विशेष व्यक्ति का बोध होता है उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहा जाता है।
कुरिया शब्द एकवचन है। (The Rajasthani word Kuriya is a singular Word)
कुरिया के उदाहरण
कुरिया राजस्थानी भाषा का शब्द है जिसके निम्न उदाहरण हैं, आइये इस शब्द को उदाहरण के माध्यम से समझते हैं।
कुरिया में गरम करेड़ा दूध में एक आछी सी महक आवे है सा।
There is a nice smell in the milk heated in Kuriya.
कुरिया राजस्थानी भाषा शब्द के समानार्थी शब्द
कुरिया का अर्थ हिंदी में कुरिया, हौरा होता है जिसके हिंदी में पर्यायवाची (
अंग्रेज़ी Synonyms) कुरिया,
हौरा होते है. इसे हिंदी में चूल्हा, अंगीठी या सिगड़ी, स्टोव आदि कहा
जाता है। चूल्हा संज्ञा पुलिंग : यह एक अंगीठी की तरह का मिट्टी का आदि का
बना हुआ पात्र जिसका आकार प्रायः घोडे़ की नाल का साया अर्द्ध चंद्र आकार
में होता है और जिसके निचे आग जलाकर भोजन पकाने का काम किया जाता है।
दोहरा चूल्हा : ऐसा चूल्हा जिस पर एक साथ दो सामग्रियों को पकाया या गर्म किया जाता है, दोहरा चूल्हा कहलाता है।