गुरु ज्ञान की ज्योति हमारी वो ही ज्योत जलाता हूँ

गुरु ज्ञान की ज्योति हमारी वो ही ज्योत जलाता हूँ

वो ही ज्योत जलाता हूँ,
गुरु की कृपा कैसे होती,
मैं वो आज सुनाता हूँ।।

गुरु बिन जीवन व्यर्थ हमारा,
वेदों ने बतलाया है,
गुरु से ही सद्करनी मिलती,
ऋषियों ने समझाया है,
गुरु ही मेरे पारब्रह्म हैं,
उनको शीश झुकाता हूँ,
गुरु की कृपा कैसे होती,
मैं वो आज सुनाता हूँ।।

गुरु का ज्ञान ले श्रीराम ने,
असुरों का संहार किया,
गुरु की कृपा से ही पार्थ ने,
द्रौपदी जी का वरण किया,
बिना गुरु नर राह भटकता,
ये सच मैं बतलाता हूँ,
गुरु की कृपा कैसे होती,
मैं वो आज सुनाता हूँ।।

गुरु का जहाँ अपमान हुआ है,
वहाँ का बेड़ा गर्क हुआ,
अपमान किया था लंकापति ने,
चूर भी उसका गर्व हुआ,
लिखे ‘मुनींद्र’ जी गुरु की गाथा,
‘संजय’ तुम्हें सुनाता हूँ,
गुरु की कृपा कैसे होती,
मैं वो आज सुनाता हूँ।।

गुरु ज्ञान की ज्योति हमारी,
वो ही ज्योत जलाता हूँ,
गुरु की कृपा कैसे होती,
मैं वो आज सुनाता हूँ।।


गुरु ज्ञान की ज्योति l Guru Gyan Ki Jyoti | गुरु जी भजन 2022

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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