चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया मन बसिया की भजन
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया मन बसिया की भजन
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे
मन बसिया की रंग रसिया की
चिट्ठी ल्याई रे
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
जोग लिखी खाटू से भक्तो
श्याम का आशीष बचियो जी
याद सतावे म्हारे टाबर की
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
कुशल मंगल मैं हूँ खाटू में
थारो हाल बता दियो जी
बेधड़क के बोलो बाता थारे मन की
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
फगणियो आयो रे लाला
मिलकर के रमझोल करा
रंग उड़ावा मिलकर खेला होली
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
बारह महिना बीतिया रे लाला
मिलबाने मन तरसे रे
घड़ी-घड़ी में म्हाने आवे हिचकी
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
थारे रंग में मैं रंग जाऊँ
मेरे रंग थे रंग जाओ
प्रेम की ओढ़ा चादर एक रंग की
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे
मन बसिया की रंग रसिया की
चिट्ठी ल्याई रे
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे
मन बसिया की रंग रसिया की
चिट्ठी ल्याई रे
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
जोग लिखी खाटू से भक्तो
श्याम का आशीष बचियो जी
याद सतावे म्हारे टाबर की
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
कुशल मंगल मैं हूँ खाटू में
थारो हाल बता दियो जी
बेधड़क के बोलो बाता थारे मन की
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
फगणियो आयो रे लाला
मिलकर के रमझोल करा
रंग उड़ावा मिलकर खेला होली
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
बारह महिना बीतिया रे लाला
मिलबाने मन तरसे रे
घड़ी-घड़ी में म्हाने आवे हिचकी
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
थारे रंग में मैं रंग जाऊँ
मेरे रंग थे रंग जाओ
प्रेम की ओढ़ा चादर एक रंग की
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे
मन बसिया की रंग रसिया की
चिट्ठी ल्याई रे
चिट्ठी ल्याई रे कोयलिया
मन बसिया की
चिट्ठी ल्याई रे।
Chitthi Lyayi re by Sanju Sharma - Khatu Shyam Dhamaal Mix
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खाटूधाम से कोयलिया एक चिट्ठी लाई है, जो मन के रंगों को और गहरा कर देती है। यह चिट्ठी श्याम की भक्ति और प्रेम का संदेश लिए हुए है, जो मन को उनके रंग में रंग देता है। खाटू की पवित्र भूमि से आई यह चिट्ठी आशीर्वाद की तरह है, जो भक्तों के दिलों को छूती है। वहाँ की यादें, श्याम के दर्शन की तड़प और उनके प्रेम की मिठास मन को बेचैन कर देती है।
खाटू में श्याम की कृपा से सब कुछ कुशल और मंगलमय है। वहाँ का हर पल, हर क्षण प्रेम और भक्ति से भरा हुआ है। मन चाहता है कि अपने दिल की सारी बातें, सारी भावनाएँ श्याम के सामने रख दी जाएँ। उनके सामने मन की हर गाँठ खुल जाती है, और आत्मा को सुकून मिलता है।
फागण का महीना आते ही उत्सव का रंग और गहरा हो जाता है। श्याम के साथ होली खेलने की चाह मन को रंगों से सराबोर कर देती है। रंग उड़ाने, रमझोल करने और प्रेम में डूबने की लालसा हर पल बढ़ती जाती है। यह होली केवल रंगों की नहीं, बल्कि दिलों के मिलन की होली है, जहाँ श्याम और भक्त एक-दूसरे में रम जाते हैं।
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बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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खाटूधाम से कोयलिया एक चिट्ठी लाई है, जो मन के रंगों को और गहरा कर देती है। यह चिट्ठी श्याम की भक्ति और प्रेम का संदेश लिए हुए है, जो मन को उनके रंग में रंग देता है। खाटू की पवित्र भूमि से आई यह चिट्ठी आशीर्वाद की तरह है, जो भक्तों के दिलों को छूती है। वहाँ की यादें, श्याम के दर्शन की तड़प और उनके प्रेम की मिठास मन को बेचैन कर देती है।
खाटू में श्याम की कृपा से सब कुछ कुशल और मंगलमय है। वहाँ का हर पल, हर क्षण प्रेम और भक्ति से भरा हुआ है। मन चाहता है कि अपने दिल की सारी बातें, सारी भावनाएँ श्याम के सामने रख दी जाएँ। उनके सामने मन की हर गाँठ खुल जाती है, और आत्मा को सुकून मिलता है।
फागण का महीना आते ही उत्सव का रंग और गहरा हो जाता है। श्याम के साथ होली खेलने की चाह मन को रंगों से सराबोर कर देती है। रंग उड़ाने, रमझोल करने और प्रेम में डूबने की लालसा हर पल बढ़ती जाती है। यह होली केवल रंगों की नहीं, बल्कि दिलों के मिलन की होली है, जहाँ श्याम और भक्त एक-दूसरे में रम जाते हैं।
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सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
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Author - Saroj Jangir
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