पल में आता पल में जाता पल में खेल रचाता है

पल में आता पल में जाता पल में खेल रचाता है

पल में आता पल में जाता,
पल में खेल रचाता है,
उस पल की कोई गम नहीं करना,
हरि कैसा रूप दिखाता है।।

किस पल में वह बाग लगाता,
किस पल फूल खिलाता है,
किस फल में वह सुगंध भरता,
किस पल में सूख जाता है,
पल में आता पल में जाता,
पल में खेल रचाता है,
उस पल की कोई गम नहीं करना,
हरि कैसा रूप दिखाता है।।

जल कि वह एक बूंद बनाता,
बूंद में बीज लगाता है,
अण्ड बनाकर पण्ड बनाता,
पण्ड में प्राण बसाता है,
पल में आता पल में जाता,
पल में खेल रचाता है,
उस पल की कोई गम नहीं करना,
हरि कैसा रूप दिखाता है।।

त्रिवेणी की तीरा ऊपर,
साधु माला भजता है,
रमता खेलता जग के माई,
कोई कोई बिरला पाता है,
पल में आता पल में जाता,
पल में खेल रचाता है,
उस पल की कोई गम नहीं करना,
हरि कैसा रूप दिखाता है।।

शंभू नाथ जी सतगुरु मिलिया,
गुरुओं का उपदेश बताता है,
जात पात गांव नहीं ठाना,
यू शंकर भजन में गाता है,
पल में आता पल में जाता,
पल में खेल रचाता है,
उस पल की कोई गम नहीं करना,
हरि कैसा रूप दिखाता है।।

पल में आता पल में जाता,
पल में खेल रचाता है,
उस पल की कोई गम नहीं करना,
हरि कैसा रूप दिखाता है।।



पल में आता पल में जाता#निर्गुणी भजन#गायक_भेरूपुरी गोस्वामी#इंदौरा लाइव

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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