रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही,
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही।
मणियन जड़ित हिलोडें आली,
मनहर डोर विविध रंग वाली,
लगी बिच बिच सुमन कली, झुलनवा झूम रही।
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूम रही।
श्याम घटा छाई मनुहारी,
त्रिबिध सुगंधित बहत बयारी,
कोयल मृद कूक भली, झुलनवा झूल रही।
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही।
नभ चढ़ देव सुमन बरसाये,
झूलन छवि लखि वलि वलि जायें,
सब जय जय करहीं भली, झुलनवा झूल रही।
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही।
हर्षित तुमहु लखहु छवि बांकी,
झूलन झांकी राम सिया की,
दृग पथ हिय उतर चली, झुलनवा झूल रही।
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही।
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही।
मणियन जड़ित हिलोडें आली,
मनहर डोर विविध रंग वाली,
लगी बिच बिच सुमन कली, झुलनवा झूम रही।
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूम रही।
श्याम घटा छाई मनुहारी,
त्रिबिध सुगंधित बहत बयारी,
कोयल मृद कूक भली, झुलनवा झूल रही।
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही।
नभ चढ़ देव सुमन बरसाये,
झूलन छवि लखि वलि वलि जायें,
सब जय जय करहीं भली, झुलनवा झूल रही।
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही।
हर्षित तुमहु लखहु छवि बांकी,
झूलन झांकी राम सिया की,
दृग पथ हिय उतर चली, झुलनवा झूल रही।
रघुवर संग जनक लली झुलनवा झूल रही।
रघुवर संग जनक लली / झूलागीत / संगीताचार्य बृजेश कुमार jhoola geet #song #folkmusic #bundelilokgeet
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जो भी इस भजन को सुनता है, वह एक सुंदर दृश्य में डूब जाता है, जहाँ भगवान राम और सीता एक साथ झूला झूल रहे हैं। उनका झूला मणियों से जड़ा हुआ है और उसमें रंग-बिरंगी डोरियाँ लगी हैं। झूले के बीच में सुंदर फूल भी लगे हैं, जो इस दृश्य को और भी मनमोहक बना रहे हैं। यह एक ऐसा क्षण है जहाँ प्रेम, सौंदर्य और शांति एक साथ मिल रहे हैं।
जब यह युगल झूला झूलता है, तो आकाश में सुंदर बादल छा जाते हैं और शीतल, सुगंधित हवा चलने लगती है। कोयल मीठी आवाज में गाती है, मानो वह भी इस उत्सव में शामिल हो रही हो। इस अनुपम दृश्य को देखकर देवता भी स्वर्ग से फूल बरसाते हैं और उनकी जय-जयकार करते हैं। यह केवल एक झूलने का दृश्य नहीं है, बल्कि राम और सीता के प्रेम का एक पवित्र उत्सव है, जिसे देखकर हर कोई आनंदित हो जाता है। यह झाँकी इतनी मनमोहक है कि यह हमारे मन में बस जाती है और हमें हमेशा के लिए खुशी देती है।
Lyrics - Bhagwat Sharan Richhariya "harshit"
singer Sangitacharya Brajesh Kumar
brijeshkumar sangitacharya Bundelkhandi
brijesh Acharya ji ke lokgeet
brijesh master ke lokgeet
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पिया पहलम जाउंगी खाटू में
आज ते पाछे भोलेनाथ ना घोटूँ भँग
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जब यह युगल झूला झूलता है, तो आकाश में सुंदर बादल छा जाते हैं और शीतल, सुगंधित हवा चलने लगती है। कोयल मीठी आवाज में गाती है, मानो वह भी इस उत्सव में शामिल हो रही हो। इस अनुपम दृश्य को देखकर देवता भी स्वर्ग से फूल बरसाते हैं और उनकी जय-जयकार करते हैं। यह केवल एक झूलने का दृश्य नहीं है, बल्कि राम और सीता के प्रेम का एक पवित्र उत्सव है, जिसे देखकर हर कोई आनंदित हो जाता है। यह झाँकी इतनी मनमोहक है कि यह हमारे मन में बस जाती है और हमें हमेशा के लिए खुशी देती है।
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Author - Saroj Jangir
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