तुम मुझे यूं जला न पाओगे

तुम मुझे यूं जला न पाओगे

तुम मुझे यूं जला ना पाओगे,
तुम मुझे यूं जला ना पाओगे।
जली लंका मेरी, जला मैं भी, तुम भी एक दिन जलाए जाओगे।।

(1)
जब भी जुल्मों की कोई बात चली, हिरण्यकश्यप, कंस, शिशुपाल, बली।
मेरा हर वर्ष जलाते पुतला, इनके पुतले तुम कब जलाओगे।।
तुम मुझे यूं जला ना पाओगे।।

(2)
मैंने सीता हरी, हरी के लिए, राक्षस कुल की बेहतरी के लिए।
मैंने प्रभु को रुलाया है वन-वन, तुम प्रभु को रुला ना पाओगे।।
तुम मुझे यूं जला ना पाओगे।।

(3)
सीता हरना तो एक बहाना था, मुझको तो राम दरस पाना था।
मैंने मरकर भी राम को पाया है, तुम ना जी कर भी राम पाओगे।।
तुम मुझे यूं जला ना पाओगे।।

(4)
आज रावण से राम डरते हैं, लक्ष्मण सीता हरण खुद करते हैं।
आज घर-घर में छुपा है रावण, आग किस-किस को तुम लगाओगे।।
तुम मुझे यूं जला ना पाओगे।।


विजय दशमी रामायण प्रसंग - रावण वाणी | तुम मुझे यूँ जला ना पाओगे | Ram Ji Ka Bhajan by Mukesh Bagda

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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