मेरा सतगुरु दीनदयाल चुंदड़ी ने रंग दीनी

मेरा सतगुरु दीनदयाल चुंदड़ी ने रंग दीनी

मेरा सतगुरु दीनदयाल,
चुंदड़ी ने रंग दीनी,
आतो ओढ़ सुहागण सुरता नार,
ओढ़ निर्मल कीनी,
मेरा सतगुरु दीनदयाल,
चुंदड़ी ने रंग दीनी।।

हंसा पाँच तत्व गुण तीन,
पच्चीसों ने वश कीनी,
हंसा नाभि कमल के बीच,
वासना ले लीनी,
मेरा सतगुरु दीनदयाल,
चुंदड़ी ने रंग दीनी।।

हंसा इड़ा पिंगला साथ,
नहायो तट त्रिवेणी,
हंसा बंक नाळ उलटाय,
अगम डांडी ले लीनी,
मेरा सतगुरु दीनदयाल,
चुंदड़ी ने रंग दीनी।।

हंसा गगन मंडल के माय,
वास करी सुण लीनी,
हंसा झिलमिल झिलमिल होय,
तार चेतन कीनी,
मेरा सतगुरु दीनदयाल,
चुंदड़ी ने रंग दीनी।।

हंसा सतगुरु मिल्या हजारीनाथ,
सेन सांची दे दीनी,
हंसा हरि गुण गावे सुरति नाथ,
सूरत ने खिला दीनी,
मेरा सतगुरु दीनदयाल,
चुंदड़ी ने रंग दीनी।।

मेरा सतगुरु दीनदयाल,
चुंदड़ी ने रंग दीनी,
आतो ओढ़ सुहागण सुरता नार,
ओढ़ निर्मल कीनी,
मेरा सतगुरु दीनदयाल,
चुंदड़ी ने रंग दीनी।।


सन्त सुरतिनाथ जी की वाणी || मेरा सतगुरु दीनदयाल चुंदड़ी || श्री कृष्णलाल जी | Krishanlal ji Ladhuwala

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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