सांचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम मुक्ति रो अवसर
सांचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम मुक्ति रो अवसर
पहलो नाम परमेश्वर को,
ओ जग मंडियो जोय,
नर मूर्ख समझे नहीं,
म्हारो हरि करे सो होय।
भागत दौड़त दिन गमायो,
नर सोवत गमाई रात,
एक घड़ी हरि ना भजियो नर,
बड़ी शर्म की बात।।
सांचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम,
मुक्ति रो अवसर आवियो,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम,
सांचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम,
मुक्ति रो अवसर आवियो,
जियो आयो, आयो अवसर आज,
मिनख जमारो भल पावियो।।
कीना कीना प्रहलाद सूं कोल,
जीव रे तारण प्रभु आविया,
जियो आयो, आयो पीपासर री माय,
हंसा मां गोद खिलाविया,
भाई रे, जाणो जाणो जाम्भोजी रे धाम।।
लियो लियो लोहट घर अवतार,
सखियां ए मंगल गाविया,
जियो लीनो, लीनो लोहट घर अवतार,
सखियां ए मंगल गाविया,
जियो जियो गावे गावे हरिजस आज,
अमिय री बरसात पड़े,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम।।
आयो आयो समराथल री माय,
विश्नोई पंथ चलावियो,
गुरुजी दीना दीना,
अमृत पानी पिलावियो,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम।।
आयो आयो रोटू नगरी माय,
उमा रे भात भरावियो,
गुरुजी फेरियो, फेरियो सिर पर हाथ,
नवरंगी ने चीर ओढावियो,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम।।
आयो आयो दूदेजी रे द्वार,
खांडे सूं राज दिलावियो,
भाई रे, आयो आयो दूदेजी रे द्वार,
खांडे सूं राज दिलावियो,
जियो रे, दीनो दीनो मेड़ते रो राज,
गुरुजी रा दर्शन पाविया,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम।।
गावे गावे जाम्भोजी रा गुणगान,
धण सुख भजन बनावियो,
भाई रे, गावे गावे हरि गुण मंगल आज,
करदो करदो भव सूं बेड़ा पार,
विश्नोई कुल में जामो पावियो,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम।।
ओ जग मंडियो जोय,
नर मूर्ख समझे नहीं,
म्हारो हरि करे सो होय।
भागत दौड़त दिन गमायो,
नर सोवत गमाई रात,
एक घड़ी हरि ना भजियो नर,
बड़ी शर्म की बात।।
सांचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम,
मुक्ति रो अवसर आवियो,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम,
सांचो कहिजे जाम्भोजी रो नाम,
मुक्ति रो अवसर आवियो,
जियो आयो, आयो अवसर आज,
मिनख जमारो भल पावियो।।
कीना कीना प्रहलाद सूं कोल,
जीव रे तारण प्रभु आविया,
जियो आयो, आयो पीपासर री माय,
हंसा मां गोद खिलाविया,
भाई रे, जाणो जाणो जाम्भोजी रे धाम।।
लियो लियो लोहट घर अवतार,
सखियां ए मंगल गाविया,
जियो लीनो, लीनो लोहट घर अवतार,
सखियां ए मंगल गाविया,
जियो जियो गावे गावे हरिजस आज,
अमिय री बरसात पड़े,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम।।
आयो आयो समराथल री माय,
विश्नोई पंथ चलावियो,
गुरुजी दीना दीना,
अमृत पानी पिलावियो,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम।।
आयो आयो रोटू नगरी माय,
उमा रे भात भरावियो,
गुरुजी फेरियो, फेरियो सिर पर हाथ,
नवरंगी ने चीर ओढावियो,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम।।
आयो आयो दूदेजी रे द्वार,
खांडे सूं राज दिलावियो,
भाई रे, आयो आयो दूदेजी रे द्वार,
खांडे सूं राज दिलावियो,
जियो रे, दीनो दीनो मेड़ते रो राज,
गुरुजी रा दर्शन पाविया,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम।।
गावे गावे जाम्भोजी रा गुणगान,
धण सुख भजन बनावियो,
भाई रे, गावे गावे हरि गुण मंगल आज,
करदो करदो भव सूं बेड़ा पार,
विश्नोई कुल में जामो पावियो,
भाई रे, सांचो कहिजे जाम्भोजी रे नाम।।
न्यू भजन - जाणों-जाणों जाम्भेजी रे धाम ।। बिश्नोई समाज के प्रसिद्ध कलाकार शंकर बिश्नोई की आवाज में
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Author - Saroj Jangir
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