सबसे ऊँची प्रेम सगा‌ई भजन

सबसे ऊँची प्रेम सगा‌ई भजन

 
सबसे ऊँची प्रेम सगा‌ई सबसे ऊँची प्रेम सगा‌ई भजन लिरिक्स Sabse Unchi Prem Sagai Bhajan Lyrics

सबसे ऊँची प्रेम सगा‌ई, सबसे ऊँची प्रेम सगा‌ई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

दुर्योधन को मेवा त्याग्यो, साग बिदुर घर पा‌ई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

झूठे फल सबरी के खाए, बहु बिद प्रेम लगाई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

प्रेम के बस अर्जुन रथ हांक्यो, भूल गए ठकुराई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,
 ऐसी प्रीत बढ़ी वृन्दावन, गोपीन नाच नचाई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

सुर क्रुर इस लायक नाहीं, कहलद करे बड़ाई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे,
हरे रामा हरे रामा, रामा रामा हरे हरे ।
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

दुर्योधन के मेवा त्याग्यो, साग विदुर घर खाई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

जूँठे फल शबरी के खाये, बहु विधि स्वाद बताई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर कीन्हा, तामे जूठ उठाई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

प्रेम के बस पारथ रथ हांक्यो, भूल गये ठकुराई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

ऐसी प्रीत बढ़ी वृन्दावन, गोपियन नाच नचाई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

प्रेम के बस नृप सेवा कीन्हीं, आप बने हरि नाई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,

सूर क्रूर इस लायक नाहीं, केहि लगो करहुं बड़ाई,
सबसे ऊंची प्रेम सगाई, सबसे ऊंची प्रेम सगाई,
सबसे ऊँची प्रेम सगाई, सबसे ऊँची प्रेम सगाई,


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दुर्योधन के मेवा त्याग्यो, साग विदुर घर पाई/खाई: श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के शाही भोजन (मेवा) को ठुकरा दिया और विदुर के घर साधारण साग खाया, क्योंकि विदुर का प्रेम सच्चा था।
जूँठे फल शबरी के खाये, बहु विधि स्वाद बताई: भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाए और उनके प्रेम की वजह से उन्हें बहुत स्वादिष्ट बताया।
प्रेम के बस अर्जुन रथ हांक्यो, भूल गए ठकुराई: श्रीकृष्ण ने प्रेम के कारण अर्जुन का रथ हाँका और अपनी दिव्य महिमा (ठाकुराई) को भुला दिया।
ऐसी प्रीत बढ़ी वृन्दावन, गोपियन नाच नचाई: वृंदावन में श्रीकृष्ण के प्रेम में गोपियों ने रासलीला में नृत्य किया, जो प्रेम का सबसे ऊँचा रूप था।
राजसूय यज्ञ युधिष्ठिर कीन्हा, तामे जूठ उठाई: युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में श्रीकृष्ण ने प्रेमवश जूठन उठाने का काम किया, जो उनके भक्तों के प्रति प्रेम को दर्शाता है।
प्रेम के बस नृप सेवा कीन्हीं, आप बने हरि नाई: राजा (भक्त) की सेवा में भगवान ने स्वयं को उनके समान बना लिया, यह प्रेम का अनुपम उदाहरण है।
सूर क्रूर इस लायक नाहीं, केहि लगो करहुं बड़ाई: कवि सूरदास कहते हैं कि मैं क्रूर और अयोग्य हूँ, फिर भी भगवान के प्रेम की महिमा किसके लिए गाऊँ? यह उनकी विनम्रता और भक्ति को दिखाता है।

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