राधा राधा जपलै नी पार लग जाएंगी भजन

राधा राधा जपलै नी पार लग जाएंगी भजन


गल मेरी तू सुण लै झल्लिए,
हुण तां एथे आ गईं ओं, तू फेर पता नहीं औणा।
मुड़-मुड़ के एह मानस चोला हथ तेरे नहीं औणा।
छाड़ झमेले सारे जग दे, लाभ जे पूरा उठौणा।
मन दा मणका फेर "मधुप",
जे प्रेम हरि दा पौँणा।

राधा राधा जप लै नी,
पार लग जाएंगी नाम वाले बेड़े।
बैठीं भव तर जाएंगी...

झूठी काया, झूठी माया, झूठा सकल पसारा,
सेवा, सिमरन, भजन, बंदगी नाल होए निस्तारा।
तन तूंबे दी तार तेरी, एह हरि नाल जुड़ जाएगी,
राधा राधा जप लै नी...

इक्को दर दी हो जावीं, ना दर-दर अलख जगावीं।
थां-थां मत्थे रगड़-रगड़ के, दाग मत्थे ना लावीं।
बैठ गुरां दे चरना विच, मौजां तू मनाएंगी,
राधा राधा जप लै नी...

लख चौरासी वाले गेड़े, जन्म-जन्म दे फेरे।
पाप-पुण्य मिट जावे, चिंता, यम आऊ ना नेड़े।
"मधुप", हरि दे घर पहुंची, तू मुड़-मुड़ के ना आएंगी,
राधा राधा जप लै नी...


Radha Radha Jap Lai Ni Paar Lag Jayeingi |Tinu Singh| |Phagwara PB| |Radha Krishan Bhajans|

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धुन : जाग नी फकीरिये जगान वाले आ गए, गुरदास मान
पद : गल मेरी तू सुणलै झल्लिए हुण ता एथे आ गइयों तू फेर पता नही औणा मुड़ मुड़ के एह मानस चोला हथ तेरे नही औणा छड झमेले सारे जग दे लाभ जे पूरा उठौणा मन दा मणका फेर "मधुप" जे प्रेम हरि दा पौणा राधा राधा जपलै नी पार लग जाएंगी नाम वाले बेड़े बैठी भव तर जाएंगी

जीवन का सत्य यही है कि यह मानव देह बार-बार नहीं मिलती। झूठी माया, झूठा संसार और इसके सारे झमेले छोड़कर मन को हरि के प्रेम में रंग लेना ही असली लाभ है। "मधुप" कहता है कि राधा का नाम जपने से मन का मणका हरि के प्रेम से जुड़ जाता है, और यही प्रेम जीवन को पार लगाता है। राधा-राधा का जाप वह बेड़ा है, जो भवसागर से तार देता है।

यह देह तूंबे की तार है, और हरि का नाम वह संगीत, जो इसे हरि से जोड़ देता है। सेवा, सिमरन, भजन और बंदगी ही वह रास्ता है, जो आत्मा को निस्तार देता है। संसार का सारा पसारा झूठा है, पर राधा का नाम सच्चा है। इस नाम को जपते रहने से मन हरि की शरण में पहुँच जाता है।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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