दैणा होया मोरी का गणेशा

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ॐ प्रभात को पर्व जाग,
गौ स्वरूप पृथ्वी जाग।
उंदकारी काठा जाग,
भानू पंखी गरुड़ जाग।।

सप्तलोक जाग,
इंद्रलोक जाग,
मेघलोक जाग,
सूर्यलोक जाग।।

चंद्रलोक जाग,
तारा लोक जाग,
पवनलोक जाग,
ब्रह्माजी को वेद जाग।।

गौरी को गणेश जाग,
हरू भरु संसार जाग।
जीव जाग, जीवन जाग,
सेतु समुद्र जाग।।

खारी समुद्र जाग, खेराणी जाग,
घोर समुद्र जाग, अघोर समुद्र जाग।
प्रचंड समुद्र जाग,
श्वेत बंधु रामेश्वर जाग।।

हूं हिवालु जाग, पाणी पयालु जाग।
बाला बैजनाथ जाग, धोली देवप्रयाग जाग।।

हरि कु हरिद्वार जाग,
काशी विश्वनाथ जाग।
बूढ़ा केदारनाथ जाग,
भोला शम्भूनाथ जाग।।

काली कुमाऊं जाग,
चोपड़ा चौथाण जाग।
खटिम कु लिंग जाग,
सोबन की गादी जाग।।

दैणा होया खोली का गणेशा हो,
दैणा होया मोरी का नरेणा हो।
दैणा होया भूमि का भूम्याला हो,
दैणा होया पंचनामा देवा हो।।

दैणा होया नौखोली का नाग हो,
दैणा होया नौखंडी नरसिंगा हो।।


#Video गणेश वंदना | दैणा होयां खोली का गणेशा Narendra Singh Negi Garhwali Ganesh Vandana Daina Hoya

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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