मैया बही पूरब से आय कुंवारी हैं रेवा माँ नर्मदा
मैया बही पूरब से आय कुंवारी हैं रेवा माँ नर्मदा
मैया बही पूरब से आय
कुंवारी है रेवा
मैया कलकल करती आय
कुंवारी है रेवा
नर-नारी आते संध्या में
दीप दान करते मैया का
भोलेनाथ बिराजे वहाँ पर
शनि देव बैठे पहरे पर
शनि देव बैठे पहरे पर
रहे झंडा लहरायें कि मैया मोरी
रहे झंडा लहरायें कुंवारी है रेवा
मैया बही पूरब से आय
कुंवारी है रेवा
कोउ चढ़ावे तोहे चुनरिया
कोउ चढ़ावे फूल पंखुड़िया
निर्मल है मैया का जल-थल
कर स्नान खुशी भये जन-मन
कोउ करे स्नान कि मैया मोरी
कोउ करे स्नान कुंवारी है रेवा
मैया बही पूरब से आय
कुंवारी है रेवा
आर-पार मैया को फेरो
कर डिंडोरी नाम बखेरो
पंचकोसी में शहर को घेरो
दक्षिण दिशा करो है फेरो
भक्त भये खुशहाल कि मैया मोरी
भक्त भये खुशहाल कुंवारी है रेवा
मैया बही पूरब से आय
कुंवारी है रेवा
मैया बही पूरब से आय
कुंवारी है रेवा
मैया कलकल करती आय
कुंवारी है रेवा
कुंवारी है रेवा
मैया कलकल करती आय
कुंवारी है रेवा
नर-नारी आते संध्या में
दीप दान करते मैया का
भोलेनाथ बिराजे वहाँ पर
शनि देव बैठे पहरे पर
शनि देव बैठे पहरे पर
रहे झंडा लहरायें कि मैया मोरी
रहे झंडा लहरायें कुंवारी है रेवा
मैया बही पूरब से आय
कुंवारी है रेवा
कोउ चढ़ावे तोहे चुनरिया
कोउ चढ़ावे फूल पंखुड़िया
निर्मल है मैया का जल-थल
कर स्नान खुशी भये जन-मन
कोउ करे स्नान कि मैया मोरी
कोउ करे स्नान कुंवारी है रेवा
मैया बही पूरब से आय
कुंवारी है रेवा
आर-पार मैया को फेरो
कर डिंडोरी नाम बखेरो
पंचकोसी में शहर को घेरो
दक्षिण दिशा करो है फेरो
भक्त भये खुशहाल कि मैया मोरी
भक्त भये खुशहाल कुंवारी है रेवा
मैया बही पूरब से आय
कुंवारी है रेवा
मैया बही पूरब से आय
कुंवारी है रेवा
मैया कलकल करती आय
कुंवारी है रेवा
जनम कुंवारी हैं मैया नर्मदा # दीनभगत # अखिलेश राजा Janam kunwari hai maiya narmada #Narmada Bhajan
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यह भजन "मैया बही पूरब से आय, कुंवारी हैं रेवा" नर्मदा नदी को पूजनीय देवी के रूप में प्रस्तुत करता है, जो पूरब दिशा से कल-कल करती, निर्मल जल लिए प्रवाहित हो रही है। यहां नर-नारी संध्या समय दीपदान करते हैं और भोलेनाथ तथा शनि देव की पूजा होती है, जो इस पवित्र धारा की सुरक्षा करते हैं। भजन में कुंवारी यानी अविवाहित, स्वच्छ और निर्मल रूप में नर्मदा माता का वर्णन है, जिसके जल से स्नान करने से श्रद्धालुओं को शुद्धि और आनंद मिलता है। भक्ति भाव से भरे इस गीत में कहा गया है कि जहां भी श्रद्धा से नर्मदा माता की पूजा-अर्चना हो, वहां भक्त खुशहाल होते हैं। यह भजन नदी की पवित्रता, धार्मिक अनुष्ठान और उसकी सांस्कृतिक महिमा को सुंदरता से दर्शाता है और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का आशीर्वाद देता है।
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Author - Saroj Jangir
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