सोच रही मन में समझ रही मन में
सोच रही मन में समझ रही मन में
सोच रही मन में, समझ रही मन में,
थारो म्हारो न्याय होवे लो सत्संग में।
ओढ़ चुनरिया मैं तो गई सत्संग में,
ओढ़ चुनरिया मैं तो गई सत्संग में,
साँवरियो भिगोई म्हाने हरे-हरे रंग में।
साधारी संगत गुरासा बिराजे,
साधारी संगत गुरासा बिराजे,
कर-कर दर्शन होई रे मगन मैं।
साधारी संगत साँवरियो बिराजे,
साधारी संगत साँवरियो बिराजे,
गाय-गाय हरि गुण, होई रे मगन मैं।
साधारी संगत सखियाँ बिराजे,
साधारी संगत सखियाँ बिराजे,
गाय-गाय हरि गुण, होई रे मगन मैं।
बाई तो मीरा के गिरधर नागर,
बाई तो मीरा के गिरधर नागर,
भवजल पार करे पल छिन में।
थारो म्हारो न्याय होवे लो सत्संग में।
ओढ़ चुनरिया मैं तो गई सत्संग में,
ओढ़ चुनरिया मैं तो गई सत्संग में,
साँवरियो भिगोई म्हाने हरे-हरे रंग में।
साधारी संगत गुरासा बिराजे,
साधारी संगत गुरासा बिराजे,
कर-कर दर्शन होई रे मगन मैं।
साधारी संगत साँवरियो बिराजे,
साधारी संगत साँवरियो बिराजे,
गाय-गाय हरि गुण, होई रे मगन मैं।
साधारी संगत सखियाँ बिराजे,
साधारी संगत सखियाँ बिराजे,
गाय-गाय हरि गुण, होई रे मगन मैं।
बाई तो मीरा के गिरधर नागर,
बाई तो मीरा के गिरधर नागर,
भवजल पार करे पल छिन में।
Soch rahi man main samaj rahi man main
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मन की गहराइयों में अनेक विचार और भावनाएँ उठती हैं, जिनमें सत्य, न्याय और समाधान की तलाश रहती है। सत्संग में जाने का अर्थ है आत्मा की प्यास को बुझाने और जीवन के प्रश्नों का उत्तर पाने की आकांक्षा। रंग-बिरंगी चुनरी ओढ़कर सत्संग में पहुँचना, जीवन में एक नवीन ऊर्जा और उमंग का संचार करता है। सांवरे के रंग में भीगना, ईश्वर के प्रेम और भक्ति में पूरी तरह डूब जाना है, जहाँ मन सांसारिक रंग-रूप छोड़कर केवल दिव्यता और आनंद में रंग जाता है।
गुरु की संगति में बैठना, साधु-संतों के साथ रहना, मन को शांति और प्रसन्नता से भर देता है। गुरु के दर्शन से आत्मा में एक अद्भुत उल्लास और आनंद की अनुभूति होती है। साधु-संगति में जब सांवरा स्वयं विराजमान हो, तब हर क्षण, हर पल, हर गीत में केवल हरि गुणों का गायन होता है, जिससे मन पूरी तरह मगन हो जाता है।
Soch rahi man main samaj rahi man main · Shree Khasoli Dham
Sant Navratan giri ji Maharaj bhajan, Vol. 3
℗ Shree Khasoli Dham
Released on: 2022-05-05
Composer: Sant Navratan giri ji Maharaj
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सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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गुरु की संगति में बैठना, साधु-संतों के साथ रहना, मन को शांति और प्रसन्नता से भर देता है। गुरु के दर्शन से आत्मा में एक अद्भुत उल्लास और आनंद की अनुभूति होती है। साधु-संगति में जब सांवरा स्वयं विराजमान हो, तब हर क्षण, हर पल, हर गीत में केवल हरि गुणों का गायन होता है, जिससे मन पूरी तरह मगन हो जाता है।
Soch rahi man main samaj rahi man main · Shree Khasoli Dham
Sant Navratan giri ji Maharaj bhajan, Vol. 3
℗ Shree Khasoli Dham
Released on: 2022-05-05
Composer: Sant Navratan giri ji Maharaj
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Author - Saroj Jangir
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